भास्कर न्यूज | गुमला गुमला नगर परिषद की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। जिस कारण नप का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसका असर है कि कभी भी शहर की साफ-सफाई सहित अन्य प्रकार की व्यवस्था बंद हो सकती है। कर्मी हड़ताल का मूड बना रहे है। कचरा उठाव के लिए शहर की दौड़ लगाने वाला वाहन का पहिया कभी भी थम सकता है। चूंकि गाड़ी में तेल की कमी हो रही है। पेट्रोल पंप संचालक पेट्रोल देने से हाथ खड़ा कर चुके हैं। यह स्थिति राजस्व वसूली में आई कमी के कारण उत्पन्न हुई है। हालांकि नप के पदाधिकारी इसे लेकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अभी तक ठोस रिजल्ट नहीं निकल सका है। जानकारी के अनुसार नप प्रतिमाह कर्मियों को 20 लाख रुपए वेतन का भुगतान करती है, लेकिन दो माह से कर्मियों को वेतन नहीं मिला है। 100 के करीब सफाई कर्मियों सहित कुल कर्मियों की संख्या 150 है। जिनका 40 लाख से अधिक मानदेय भुगतान बाकी है। जनवरी में भी वेतन नहीं मिला, तो तीन महीना हो जाएगा। चूंकि इन्हें नवंबर माह से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में कर्मियों का घर चलना मुश्किल हो रहा है। जिस कारण वे हड़ताल को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। दूसरी तरफ पेट्रोल पंप संचालक का आठ लाख रुपए बकाया है। चार माह से तेल का पैसा नहीं दिया गया है। जिस कारण पेट्रोल पंप संचालक कभी भी तेल देना बंद कर सकते हैं। शहर में चलने वाली 21 सफाई गाड़ियों में तेल का भुगतान जलापूर्ति व साफ-सफाई मद से होता है। इस मद की राशि ट्रांसफर के लिए एसडीओ का काउंटर सिग्नेचर लगेगा, लेकिन एसडीओ का साइन नहीं हो पाने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है। हालांकि एसडीओ ने जरूरी दस्तावेज अपने पास मंगवाए है, तो एक-दो दिनों में हस्ताक्षर होने के उपरांत भुगतान संभव हो सकेगा। चूंकि इस मद में राशि पर्याप्त है। समय पर होगा वेतन भुगतान, राजस्व वृद्धि पर जोर : नप में इंजीनियरों की प्रतिनियुक्ति के बाद आर्थिक बजट बढ़ गया। इस साल कुछ आर्थिक बोझ भी बढ़ा और टैक्स वगैरह के उम्मीद के अनुरूप नहीं आ पाने के कारण यह हालात उत्पन्न हुए है। प्रशासक सारजेन मरांडी ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर रखना नप की प्राथमिकता है। साफ-सफाई प्रभावित नहीं होगी। कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए प्रकिया की जा रही है। दो-तीन दिनों में वेतन दिया जाएगा। पेट्रोल पंप का बकाया भी भुगतान कर दिया जाएगा। राजस्व वृद्धि पर जोर दिया जा रहा है। बकाया होल्डिंग टैक्स के भुगतान के लिए डीसी से भी अनुरोध किया जाएगा ताकि सरकारी कार्यालयों का बकाया प्राप्त हो सके। प्रशासक राज में विकास हुआ प्रभावित निवर्तमान अध्यक्ष दीपनारायण उरांव, उपाध्यक्ष कलीम अख्तर, निवर्तमान पार्षद हरजीत सिंह, उज्जवल केशरी, आरिफ आलम, ललिता गुप्ता व शैल मिश्रा ने इस व्यवस्था के लिए नप को दोषी दार ठहराया है। कहा कि जब तक बोर्ड थी। ऐसे हालात कभी नहीं आए थे। प्रशासक राज में नागरीय सुविधाएं कम हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द नप का चुनाव हो कि बोर्ड विकास की लकीर खींच सके और नप की आर्थिक स्थिति काके मजबूत कर सके।


