अमृतसर| 1964 में गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब के प्रबंधन को महंतों से मुक्त किए जाने के दौरान हुए नरसंहार में शहीद सिखों की याद में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में गुरमत समागम का आयोजन किया गया। श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद हजूरी रागी भाई जगदीप सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया। भाई प्रेम सिंह ने अरदास की और सचखंड श्री हरमंदर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी भाई गुरमिंदर सिंह ने संगत को पवित्र हुकमनामा सुनाया। गौरतलब है कि श्री पांवटा साहिब नरसंहार के दौरान निहंग संगठन मिसल शहीदां तरना दल के 11 सिंह शहीद हो गए थे। इस हत्याकांड के गवाह मिसल शहीद तरना दल के प्रमुख बाबा निहाल सिंह हैं, जिन्हें पंथ द्वारा जीवित शहीद की उपाधि दी गई है। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख समुदाय आजादी के बाद गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब में हुए नरसंहार को कभी नहीं भूल सकता।


