गुरु नानकपुरा क्षेत्र में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य एवं मंगलमय समापन परीक्षित मोक्ष प्रसंग के साथ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। श्रीधाम अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध आचार्य जी के श्रीमुख से प्रवाहित अमृतवाणी ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कथा के अंतिम दिवस आचार्य जी ने राजा परीक्षित के मोक्ष का अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि कल्पतरु के समान है, जो भक्तों की लौकिक कामनाओं को पूर्ण करते हुए उन्हें परम मोक्ष का मार्ग दिखाती है। उन्होंने बताया कि जो श्रद्धा और विश्वास के साथ श्रीमद् भागवत का श्रवण करता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। आचार्य जी ने कहा कि राजा परीक्षित को अल्प समय में मोक्ष की प्राप्ति केवल श्रीमद् भागवत कथा श्रवण के कारण हुई। यह कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली तथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में भक्ति को स्थान दें और सत्संग से जुड़ें। कथा के दौरान संगीतमय भजनों, श्लोकों और सुंदर प्रसंगों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पूरे पंडाल में “हरे कृष्ण हरे राम” के जयघोष गूंजते रहे। अंतिम दिवस हवन, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का विधिवत समापन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, महिला मंडल एवं युवा वर्ग उपस्थित रहा।


