भास्कर न्यूज़ | लुधियाना। गुरु नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज (जीएनडीईसी) ने अपने प्लैटिनम जुबली सेलिब्रेशन के तहत नेशनल लेवल हैकाथॉन ‘हैकनॉट्स 2025’ को बड़ी सफलता के साथ होस्ट किया। कॉस्मिक क्लब और आईटियन क्लब के सहयोग से आयोजित इस 24 घंटे की कोडिंग मैराथॉन में देशभर से करीब 60 टीमों ने जोश के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत एप्लाइड साइंसेज विभाग की हेड डॉ. हरप्रीत कौर ग्रेवाल के उद्घाटन संबोधन से हुई। इसके बाद आईटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित कामरा और मुखी डॉ. कुलविंदर सिंह मान ने प्रतिभागियों को मोटिवेट करते हुए हैकाथॉन के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य सत्र के दौरान जीएनडीईसी के प्रिंसिपल डॉ. सहजपाल सिंह ने छात्रों को इनोवेशन अपनाने और भविष्य की तकनीक में सार्थक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। इस बीच गौरव गुप्ता ने एआई रोबोट डॉग ‘चीची’ का लाइव डेमो दिया, जिसने छात्रों में उत्साह भर दिया। इसी कड़ी में पहले पंजाबी कोडिंग कंटेंट क्रिएटर सिराकोडर मनिंदर सिंह ने प्रेरणादायक सत्र लेते हुए युवाओं को टेक्नोलॉजी के नए रास्तों पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। दूसरे चरण में 15 टीमें शॉर्टलिस्ट हुई: हैकाथॉन के दूसरे चरण में 15 शॉर्टलिस्ट टीमों ने अपने प्रोजेक्ट एक्सपर्ट जूरी के सामने प्रस्तुत किए। सभी टीमों ने अपने आइडियाज के जरिए सोशल इंपैक्ट और टेक्निकल इनोवेशन के बेहतरीन उदाहरण पेश किए। समापन समारोह में जीएनई 1992 बैच के एल्युमनाई और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजीनियर विपिन सहगल और एचआर लीडर शान वत्स ने छात्रों को संबोधित करते हुए करियर और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। कॉलेज मैनेजमेंट ने सभी स्पॉन्सर्स, मेंटर्स, फैकल्टी और वॉलंटियर्स का विशेष धन्यवाद किया, जिनकी मेहनत से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विजेता टीमों ने जीता सम्मान : हैकनॉट्स 2025 का रिजल्ट में पहला इनाम 21,000 रुपए टीम ‘कोडब्लॉक’ (जीएनडीपीसी) ने जीता, जबकि दूसरा इनाम 15,000 रुपए टीम ‘जेनिथ’ (चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी) के नाम रहा। तीसरे इनाम पर 11,000 रुपए पर एमएसआईटी दिल्ली की टीम ‘बिट्स’ ने कब्जा किया। वहीं कैंपस एडिशन इनाम 3,000 रुपए टीम ‘हैकस्ट्रीट बॉयज’ (जीएनडीईसी) को मिला। पूरे कार्यक्रम ने युवा प्रतिभाओं को अपनी क्रिएटिविटी और टेक स्किल्स दिखाने का मजबूत मंच दिया और यह हैकाथॉन कॉलेज की इनोवेटिव स्पिरिट का यादगार उदाहरण बनकर खत्म हुआ।


