गृहमंत्री का दावा:10 साल में बस्तर बनेगा देश का सबसे विकसित ट्राइबल जिला

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक बार फिर अपनी बात दोहराते हुए कहा कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार किसी पर भी गोली चलाना नहीं चाहती। माओवादी हथियार डाल दें हम उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेंगे। शाह ने महिला माओवादियों से कहा कि जो बच्चियां हाथ में बंदूक लेकर खड़ी हैं उनसे दोनों हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि आप सरेंडर कर दीजिए आपके लिए आगे अच्छा जीवन इंतजार कर रहा है। शाह ने ‘छत्तीसगढ़ के 25 साल’ पर आधारित किताब के विमोचन के दौरान यह बातें कहीं। शाह ने दावा किया कि 90 प्रतिशत क्षेत्र नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है और मार्च 2026 तक इस समस्या को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब तेजी से सड़क, स्कूल, अस्पताल, मोबाइल टावर और रेल कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है। केंद्र सरकार ने अतिरिक्त 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं और आदिवासी परिवारों तक राशन, स्वास्थ्य और बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के लिए विशेष पहल की गई है। कांग्रेस सरकार ने 5 साल तक नक्सलवाद को प्रश्रय दिया
केंद्रीय गृहमंत्री ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पांच वर्षों के दौरान राज्य में कई घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए। उस दौरान नक्सल आंदोलन को अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्रय मिला, जिससे विकास की गति प्रभावित हुई। शाह ने कहा कि जनता ने इसी कारण कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर किया और अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी है। छत्तीसगढ़ नक्सलगढ़ से विकास का मॉडल बन रहा, अंत की ओर नक्सलवाद का अस्तित्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को नवा रायपुर में वामपंथी उग्रवाद पर उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा का सबसे बड़ा गढ़ माना जाने वाला छत्तीसगढ़ अब निर्णायक बदलाव के दौर में है। शाह ने स्पष्ट कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में नक्सलवाद अंत के कगार पर पहुंच चुका है और 31 मार्च 2026 से पहले देश को पूरी तरह नक्सल-मुक्त कर दिया जाएगा। गृह मंत्री ने सुरक्षा समीक्षा के साथ-साथ प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की और कहा कि डबल इंजन सरकार के मॉडल ने छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल दी है। अमित शाह ने कहा कि केन्द्र और छत्तीसगढ़ सरकार की बहु-स्तरीय रणनीति अब ज़मीन पर असर दिखा रही है। इसमें नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा केन्द्रित ऑपरेशन, सड़कों, टेलीकॉम, कैंप और बुनियादी सुविधाओं का तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, नक्सलियों के वित्तीय नेटवर्क पर सख्त प्रहार, प्रभावी और आकर्षक आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति शामिल है। गृह मंत्री ने कहा कि जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा की वजह से सुर्खियों में रहता था, वह आज विकास की नई पहचान बना रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को समान विकास अवसर से जोड़ा जाना है। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव, आईबी निदेशक, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सीआरपीएफ, एनआईए, बीएसएफ, आईटीबीपी के महानिदेशक तथा छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक मौजूद रहे। समन्वय पर फोकस, पड़ोसी राज्यों की शरण न लें नक्सली
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब उस दौर में पहुंच चुकी है, जहां सिर्फ ऑपरेशन चलाना काफी नहीं, बल्कि राज्यों और एजेंसियों के बीच सटीक समन्वय ही निर्णायक भूमिका निभाएगा। रायपुर में समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने केंद्रीय और राज्यों की एजेंसियों से दो टूक कहा कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान बिखरा हुई नहीं बल्कि संगठित और समन्वय के साथ होना चाहिए और पड़ोसी राज्यों में नक्सली जाकर न छिप जाएं। दरअसल, सुरक्षा एजेंसियों के सामने लंबे समय से एक बड़ी चुनौती यह रही है कि दबाव बढ़ने पर नक्सली एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा में खिसक जाते हैं। घने जंगलों और दूरस्थ इलाकों से घिरी अंतरराज्यीय सीमाएं उनके लिए अस्थायी शरणस्थली बन जाती हैं। इससे अभियान की रफ्तार टूटती है और बलों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ती है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को और मजबूत किया जाए। केंद्रीय एजेंसियों सीआरपीएफ, आईबी, एनआईए और राज्य पुलिस बलों के बीच ऐसा तंत्र हो, जहां किसी भी संदिग्ध मूवमेंट, फंडिंग चैनल या कैडर गतिविधि की सूचना तुरंत साझा हो और संयुक्त कार्रवाई में देरी न हो। रणनीति का उद्देश्य साफ है कि नक्सलियों के लिए किसी भी क्षेत्र को सुरक्षित ठिकाना बनने से रोकना। सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा घेरा मजबूत कर लगातार दबाव बनाए रखना और ऑपरेशनों को एक-दूसरे से जोड़कर चलाना अब फोकस में है। सुरक्षा जानकार मानते हैं कि नक्सलवाद के इस अंतिम चरण में इंटर-स्टेट समन्वय ही वह कड़ी है, जो संगठन के बचे हुए ढांचे को पूरी तरह तोड़ सकती है। स्पष्ट है कि सरकार अब नक्सलवाद को किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि साझा राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती मानते हुए अंतिम प्रहार की रणनीति पर काम कर रही है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *