कोंडागांव में आदिवासी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की अनूठी पहल शुरू हुई है। जंगो रायतार समाज कल्याण समिति ने ग्राम मसोरा स्थित अपने स्कूल में सात दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है। इस आवासीय प्रशिक्षण में बस्तर संभाग के कांकेर, नारायणपुर, चारामा और कोंडागांव से 26 शिक्षक भाग ले रहे हैं। शिविर 2 से 8 जून तक चलेगा। शिक्षकों को नई शैक्षणिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें आधारभूत शैक्षणिक कौशल और आदर्श कक्षा संचालन शामिल है। गोंडी विशेषज्ञ शिक्षक प्रत्यक्ष अध्यापन कर रहे हैं। वे शिक्षकों को गोंडी भाषा का व्याकरण और उच्चारण सिखा रहे हैं। साथ ही संस्कृति से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी दे रहे हैं। रोल प्ले और केस स्टडी के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का मकसद संस्था के सचिव पीला राम मरकाम के मुताबिक, यह कार्यक्रम सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह प्रशिक्षण पूरे समाज के लिए सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बन रहा है।


