गोरखपुर में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण पूरा किए बिना ही 27 लाख रुपये निकाल लेने का मामला सामने आया है। जांच में इस बात की पुष्टि होने पर दो पंचायत सचिवों से पैसे की रिकवरी करने व उनपर एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। ये मामले बेलघाट व चरगांवा ब्लाकों में प्रकाश में आए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) नीलेश प्रताप सिंह ने दोनों ब्लाकों के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
उपनिदेशक पंचायत एवं अंत्येष्टि स्थल निर्माण योजना के नोडल अधिकारी राघवेंद्र कुमार द्विवेदी 3 व 4 जनवरी को गोरखपुर में अंत्येष्टि स्थलों के निर्माण की स्थिति देखने आए थे। उन्होंने विभिन्न ब्लाकों के कई गांवों में स्थलीय सत्यापन किया। बेलघाट के नरगड़ा शिवदत्त सिंह एवं चरगांवा के अमवां ग्राम पंचायत में निर्माण में अनियमितता मिली। अमवां में 15 लाख रुपये जबकि नरगड़ा शिवदत्त सिंह में 12 लाख रुपये की अनियमितता का पता चला।
नहीं कराए गए थे कई कार्य
निरीक्षण में यह बात सामने आयी कि अमवां ग्राम पंचायत में शवदाह का प्लेटफार्म, वुड स्टोर, कार्यालय कक्ष, आंतरिक इंटरलाकिंग टाइल्स, रोड कनेक्टिविटी इंटरलाकिंग टाइल्स नहीं लगाई गई थी। इसके साथ ही प्लांटेशन भी नहीं किया गया। शांति स्थल के निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि वह कभी भी गिर सकता है। नोडल अधिकारी ने रिपोर्ट दी है कि बिना मानक के अनुसार काम कराए ही 15 लाख रुपये निकाल लिए गए।
बेलघाट के गांव में यह मिली अनियमितता
बेलघाट के गांव में भी इसी तरह की अनियमितता मिली है। यहां भी शवदाह प्लेटफार्म नहीं बनवाया गया है। हैंडपंप के ड्रेनेज की व्यवस्था का काम भी नहीं किया गया है। हार्टीकल्चर व प्लांटेशन का काम यहां भी अधूरा पाया गया। बिना पूरा काम कराए ही यहां 12 लाख रुपये निकाल लिए गए।
3 साल पहले कराया गया था निर्माण
चरगांवा के अमवां ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण वर्ष 2021-22 में जबकि बेलघाट के नरगड़ा शिवदत्त सिंह ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण 2020-21 में कराया गया था। दोनों ग्राम पंचायतों के तत्कालीन सचिवों पर एफआइआइर कराई जाएगी और उनसे वसूली भी होगी। जानिए क्या कहते हैं अधिकारी
डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि बेलघाट एवं चरगांवा ब्लाकों के एक-एक ग्राम पंचायत में पूर्व में निर्मित अंत्येष्टि स्थलों में अनियमितता पायी गई है। नोडल अधिकारी की जांच में यह बात सामने आयी है। वहां लगभग 27 लाख रुपये निकाले गए हैं। तत्कालीन सचिवों से धनराशि की वसूली होगी। उनपर एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।


