राजधानी समेत प्रदेश के करीब 12 कोल कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी के बाद कई खुलासे हुए हैं। अभी तक इन कोयला कारोबारियों से 43 करोड़ से ज्यादा की टैक्स वसूली हो चुकी है। स्टेट जीएसटी को अभी आठ कोल कारोबारियों और 20 से ज्यादा ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। इसमें ज्यादातर रायपुर और बिलासपुर के कारोबारी हैं। इनसे 100 करोड़ से ज्यादा का टैक्स मिलने का दावा किया जा रहा है। टैक्स चोरी का खेल रिजेक्ट कोयला से किया जा रहा है। बड़े कारोबारी कोयले में हर बार 30% कोयला खराब या रिजेक्ट बताते हैं। कोयला के रिजेक्ट होने के साथ ही जीएसटी भी 18% से घटकर 5% हो जाती है। बाद में इसी कोयले को अच्छा कोयला बताकर बेच दिया जाता है। रिजेक्ट कोयले की गाड़ी होने की वजह से जांच में भी इसका आसानी से खुलासा नहीं हो पाता है। इस रिजेक्ट कोयले की कमाई को भी कहीं भी नहीं दर्शाया जाता है। जांच में यह भी पता चला है कि इस खेल से कमाई जाने वाली रकम को विदेशों में निवेश किया जा रहा है। रोज लाखों की चोरी,पर पकड़ में नहीं आ रही: कोल कारोबारी रोज 18 से 28 टन वाली हर गाड़ी में इसी तरह का गोलमाल कर रहे हैं। एक दिन में अलग-अलग जगहों से करीब चार हजार कोयला गाड़ी निकलती है। इसमें सबसे ज्यादा कोरबा कोल खदानों से गाड़ी निकलती है। इतनी बड़ी संख्या में गाड़ी निकलने की वजह से टैक्स चारों भी लाखों में पहुंच जाती है। इंडोनेशिया और साउथ अफ्रीका से भी कनेक्शन छत्तीसगढ़ के कोल कारोबारियों के इंडोनेशिया और साउथ अफ्रीका में भी कनेक्शन मिले हैं। यहां के कोल खदानों में छत्तीसगढ़ के कोल व्यापारियों ने निवेश किया है। यहां से भी कोयला मंगाया जाता है। लेकिन कारोबारी विदेश से आने वाले कोयले को भी स्थानीय खदानों से निकला हुआ बताकर टैक्स की चोरी कर रहे हैं। स्टेट जीएसटी विभाग इसकी भी जांच कर रहा है। मुख्य बातें कोयले का परिवहन नहीं और ई-वे बिल बन गया
जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि कोल कारोबारी बिना कोयला परिवहन किए आसानी से फर्जी ई-वे बिल भी बना रहे हैं। ई-वे बिल बनाने का सिस्टम इतना आसान है कि इस चोरी को पकड़ना भी मुश्किल है। एक साल की कड़ी जांच के बाद ही कुछ बड़े कारोबारियों के यहां ही इसका खुलासा हो पाया है। यही वजह है कि ई-वे बिल बनाने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने नए सिरे से मंथन भी किया जा रहा है। इतना ही नहीं एक ही ई-वे बिल से कोयला की कई खेप को एक शहर से दूसरे शहर और एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचा दिया जा रहा है। खदानों से निकले कोयले को दूसरी जगहों से मिला है कहकर भी फर्जी ई-वे बिल तैयार हो जा रहा है। टैक्स चोरी करने वालों को नहीं बख्शेंगे
जो टैक्स की चोरी करेंगे उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। फर्जी कंपनियों की लगातार जांच जारी है। विभाग के अफसर पूरे प्रमाण के साथ जांच के लिए पहुंचते हैं। फर्जीवाड़ा करने वालों को हर हाल में टैक्स की रकम सरेंडर करनी ही होगी। -ओपी चौधरी, वित्त मंत्री छत्तीसगढ़


