रेगिस्तान के समंदर और स्वर्णनगरी की स्वर्णिम आभा के बीच बुधवार की रात एक नए इतिहास की गवाह बनी। अवसर था साल 2025 को विदाई देने और नई उम्मीदों के साथ ‘वर्ष 2026’ के इस्तकबाल का। जैसलमेर के धोरों से लेकर शहर की आलीशान होटलों तक, जश्न का ऐसा सैलाब उमड़ा कि कड़ाके की ठंड भी सैलानियों के उत्साह के आगे फीकी पड़ गई। सम स्थित फोर्ट अरण्या रिसोर्ट में परिवार समेत पहुंचे कांग्रेस के पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव ने इस दौरान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के अंदाज में गले से गमछा निकाला और उसे हवा में लहराते हुए थिरकना शुरू कर दिया। लोगों ने इस मोमेंट को खूब एन्जॉय किया। रात के 12 बजते ही पूरा जैसलमेर आतिशबाजी की गूंज से दहल उठा। बड़े होटलों से लेकर सम और खुहड़ी के रिसॉर्ट्स तक, आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से नहा गया। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहा और केक काटकर खुशियां बांटी। इस दौरान आतिशबाजी भी की गई। डोटासरा स्टाइल में दिखे पूर्व विधायक इस बार जैसलमेर के जश्न में केवल पर्यटन का रंग ही नहीं, बल्कि सियासत का तड़का भी लगा। सम रोड स्थित एक प्रतिष्ठित रिसॉर्ट फोर्ट अरण्या में आयोजित पार्टी में उस वक्त रोमांच चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस के पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव मंच के करीब पहुंचे। जैसे ही डीजे पर राजस्थान का लोकप्रिय गीत ‘तेजल लीलण सुपर-डुपर’ गूंजा, धनदेव ने पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के अंदाज में गले से गमछा निकाला और उसे हवा में लहराते हुए थिरकना शुरू कर दिया। उनके इस बेबाक अंदाज ने वहां मौजूद युवाओं और समर्थकों में जोश भर दिया। पूर्व विधायक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे राजनीति की गंभीरता छोड़ नए साल के स्वागत के रंग में रंगे नजर आए। सूफी सुरों और कालबेलिया नृत्य का संगम संगीत की नगरी कहे जाने वाले जैसलमेर में नए साल की शाम सुरों के नाम रही। विख्यात ‘रागधानी बैंड’ ने जब अपने सूफी नग्मे छेड़े, तो सम के धोरों पर मखमली शांति छा गई। वहीं, दूसरी ओर राजस्थान की मशहूर कालबेलिया डांसर करिश्मा ने अपनी चपलता से सबको हैरान कर दिया। करिश्मा के साथ थिरकने के लिए देसी और विदेशी सैलानियों में होड़ मच गई। राजस्थानी लोक कलाकारों ने ‘पधारो म्हारे देश’ और ‘केसरिया बालम’ की तान छेड़कर विदेशी मेहमानों को राजस्थान की संस्कृति से रूबरू करवाया। 12 बजते ही आतिशबाजी से नहाया आसमान रात के जैसे ही 11:59 हुए, चारों तरफ एक पल के लिए सन्नाटा पसरा, लेकिन जैसे ही घड़ी की सुइयां 12 पर मिलीं, पूरा जैसलमेर आतिशबाजी की गूंज से दहल उठा। सूर्यागढ़, मेरियट जैसे बड़े होटलों से लेकर सम और खुहड़ी के रिसॉर्ट्स तक, आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से नहा गया। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहा और केक काटकर खुशियां बांटी। धोरों पर बसा ‘मिनी वर्ल्ड’ जैसलमेर की स्टार कैटेगरी होटलों के साथ-साथ रेगिस्तान के कैंपों में भी पैर रखने की जगह नहीं थी। रिसॉर्ट पर हजारों की संख्या में सैलानी जुटे थे। सम और खुहड़ी के धोरों पर चकाचौंध लाइटिंग ने ऐसा भ्रम पैदा किया जैसे रेगिस्तान के बीचों-बीच कोई नया आधुनिक शहर बस गया हो। कड़ाके की सर्द हवाओं के बीच अलाव (बोनफायर) के पास बैठकर विदेशी सैलानी राजस्थानी व्यंजनों—केर-सांगरी और बाजरे की रोटी का लुत्फ उठाते नजर आए। सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम हजारों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर सम रोड तक पुलिस की गश्ती टीमें तैनात रहीं। जिला प्रशासन ने हुड़दंग रोकने के लिए विशेष निर्देश जारी किए थे, जिसके चलते जश्न शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।


