गोल्डन टाइम में इलाज मिलने से बच जाती है जान:108 एंबुलेंस ने 11 माह में 6075 लोगों को समय पर अस्पताल छोड़ा

इमरजेंसी हेल्थ सर्विस 108 एंबुलेंस ने इस साल 6075 लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाया। इनमें अधिकांश हादसों में घायल हुए थे। पिछले साल से यह आंकड़ा 361 अधिक है, जबकि इसमें दिसंबर के आंकड़े शामिल नहीं हैं। देखा जाए तो ठंड यानी नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी में अधिक हादसे सामने आए हैं। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी सबसे ज्यादा (करीब 40 प्रश) 2361 मामले जूनी इंदौर क्षेत्र से हैं। सड़क हादसों में घायल होने, आग से झुलसने, हार्ट अटैक, डिलीवरी, डॉग बाइट सहित विभिन्न मामलों में लोगों द्वारा 108 की सेवा ली जाती है। हालांकि, सर्वाधिक मौकों पर एक्सीडेंट केस में ही इस एंबुलेंस को बुलाया जाता है। इसका रिस्पांस टाइम 3 से 10 मिनट में पहुंचना सबसे अहम है। घायल या मरीज को समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाए और उसे अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो बचने के चांस बढ़ जाते हैं। पीआरओ तरुण सिंह के अनुसार 108 का पहला ध्येय समय पर मरीज को अस्पताल पहुंचाना रहता है। जिले में वर्ष 2024 में जनवरी से नवंबर तक छह हजार से ज्यादा लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाया है। इसे गोल्डन अवर कहा जाता है। ये सुविधाएं रहती हैं 108 में जीवन रक्षक सामग्री से लैस 108 एंबुलेंस में अम्बुवैग, ब्लड प्रेशर नापने के लिए उपकरण, पल्स नापने के पल्स ऑक्सीमेंटर, शुगर की जांच के लिए ग्लूकोमीटर, तापमान जांचने के लिए थर्मामीटर और जीवन रक्षक ऑक्सीजन की व्यवस्था रहती है। इसके अलावा आपातकालीन दवाइयां भी रहती हैं।

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