गोल्डन टेंपल पहुंचे पंजाबी एक्टर गुग्गू गिल:’शौंकी सरदारा’ फिल्म को लेकर अरदास की, युवाओं को नशा छोड़ने का संदेश दिया

पंजाबी सिनेमा के मशहूर अभिनेता गुग्गू गिल आज अमृतसर के गोल्डन टेंपल पहुंचे। उन्होंने गुरु के घर में माथा टेककर सभी के कल्याण की प्रार्थना की (सर्बत के भले की अरदास की)। उन्होंने वाहेगुरु का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वह अपनी आने वाली फिल्म ‘शौंकी सरदारा’ से पहले गुरु के चरणों में अरदास करने आए हैं ताकि फिल्म सफल हो और उन्हें दर्शकों का आशीर्वाद मिले। मीडिया से बातचीत करते हुए गुग्गू गिल ने कहा कि गोल्डन टेंपल में माथा टेकने की उनकी बहुत पुरानी इच्छा थी और आज उन्हें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने गुरु के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया और कहा कि आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ वह अब अपनी आने वाली फिल्म के प्रमोशन और रिलीज की तैयारी में जुट जाएंगे। फिल्म ‘शौंकी सरदारा’ 16 मई को होगी रिलीज गुग्गू गिल ने जानकारी दी कि उनकी नई फिल्म ‘शौंकी सरदारा’ 16 मई को रिलीज हो रही है। इस फिल्म में वे पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के दिग्गज बब्बू मान और गुरु रंधावा के साथ नज़र आएंगे। उन्होंने कहा कि फिल्म को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं और दर्शकों से इसे खूब प्यार मिलने की उम्मीद है। सिनेमा के जरिए समाज को संदेश देना चाहते हैं गुग्गू गिल ने कहा कि वह हमेशा ऐसे किरदारों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में एक सकारात्मक संदेश दें। उन्होंने अपनी फिल्मों ‘सिकंदर’, ‘बदला जट्टी दा’, ‘जट्ट ते ज़मीन’ को याद करते हुए कहा कि ये उनके लिए बहुत खास रहीं क्योंकि इनमें उन्होंने चुनौतीपूर्ण और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं। गुग्गू गिल ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में उन्हें मौका मिला, तो वे सिख इतिहास के महान योद्धा ‘हरी सिंह नलवा’ पर फिल्म करना चाहेंगे और उनका किरदार निभाना उनके लिए गर्व की बात होगी। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। युवाओं को नशों से बचाने का संदेश अभिनेता ने पंजाब में फैल रही नशाखोरी पर चिंता जताते हुए कहा कि आज नशा युवाओं की रग-रग में समा गया है, जो बेहद दुखद है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को खेलों और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें ताकि वे नशे की लत से दूर रहें और समाज के निर्माण में सकारात्मक योगदान दे सकें। गुग्गू गिल ने कहा कि सिर्फ सरकारें या समाजसेवी संस्थाएं अकेले नशा मुक्त समाज नहीं बना सकतीं, जब तक आम लोग स्वयं जागरूक नहीं होंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जन जागरूकता ही नशे से मुक्ति का एकमात्र रास्ता है।

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