गोल्डन टेंपल के सेवादारों की वर्दी में एक अहम और जरूरी बदलाव किया गया है, जो परंपरा, अनुशासन और गरिमा को और अधिक सशक्त बनाता है। इस नई व्यवस्था के तहत अब गोल्डन टेंपल में तैनात सुरक्षा सेवा दल के सेवादार दो अलग-अलग रंगों — पीले और गहरे नीले — की वर्दियों में सेवा करते हुए दिखाई देंगे। इन वर्दियों को सप्ताह में बारी-बारी से दो- दो दिन पहनने की व्यवस्था तय की गई है, ताकि एकरूपता और अनुशासन बना रहे। इस बदलाव की खास बात यह है कि यदि सेवादार पीले रंग की वर्दी पहनेंगे तो उनकी पगड़ी नीले रंग की होगी, और यदि वर्दी नीले रंग की होगी तो पगड़ी पीले रंग की रहेगी। रंगों का यह संतुलन सिख परंपरा और खालसाई पहचान को दर्शाता है। सेवादारों को ये नई वर्दियां वितरित की जा चुकी हैं और जिन सेवादारों को अभी वर्दी नहीं मिली है, उन्हें भी जल्द ही प्रदान की जाएगी। नई वर्दी के दोनों कंधों पर खंडे की सुंदर नक्काशी की गई है, जो सिख धर्म में साहस, सेवा और सत्य का प्रतीक मानी जाती है। वर्दी के सीने पर साफ अक्षरों में गोल्डन टेंपल, श्री अमृतसर लिखा गया है, जिससे सेवादारों की पहचान और भी स्पष्ट होती है। इसके साथ-साथ सेवादार सफेद रंग का हजूरिया भी पहनेंगे, जो पवित्रता, विनम्रता और सेवा भाव का प्रतीक है। इसके अलावा, सेवादारों को कमरकस्से के रूप में विशेष कपड़े की बेल्ट दी जाएगी, साथ ही पगड़ी पर सजाने के लिए खंडे भी प्रदान किए जाएंगे। इन सभी बदलावों से सेवादारों की वेशभूषा और अधिक गरिमामयी, दर्शनीय और प्रभावशाली बन गई है ।


