गोस्सनर कॉलेज रांची के अंग्रेजी विभाग में व्याख्यान का आयोजन किया गया। विषय था हाशिए से केंद्र की ओर भारतीय अकादमिक दायरे में आदिवासी साहित्य। मुख्य अतिथि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की एसोसिएट प्रो डॉ आईवी हांसदा थीं। उन्होंने हाशिए के लेखन पर बातचीत करते हुए कहा कि दलित साहित्य मुख्यधारा के साहित्य में शामिल हो चुका है। वहीं, आदिवासी साहित्य आज भी हाशिए पर है। इसका प्रमुख कारण प्रभावी वर्ग अपनी भाषा और साहित्य को लेकर शुरू से मुखर रहा है। आदिवासी साहित्य वाचिक परम्परा को लेकर आगे बढ़ा। इसलिए इसका प्रामाणिक दस्तावेज कम उपलब्ध है। दूसरा कारण, कई क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं की अपनी लिपि नहीं है। आदिवासियों का उल्लेख पौराणिक धर्म ग्रंथों रामायण (शबरी ), महाभारत (एकलव्य), पुराणों आदि में भी मिलता है। आदिवासियों के नेतृत्वकर्ता इतिहास के मध्यकाल विशेष कर मुगल कालखंड में कम मुखर रहे।


