झाबुआ के नेहरू मार्ग स्थित महाकालिका माता मंदिर परिसर में गीता जयंती समारोह समिति की ओर से “श्यामा श्याम की लाडली वेदलक्षणा गौ-माता” की दिव्य कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिले में यह इस तरीके का पहला आयोजन है। कथा का वाचन एशिया की सबसे बड़ी गोशाला, पथमेड़ा से पधारे सुप्रसिद्ध गौ-संत गोशरणानंदजी सरस्वती महाराज कर रहे हैं। व्यास पीठ से महाराज जी ने गौ-माता की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गौ-माता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि पूजनीय शक्ति और ‘राष्ट्र माता’ माना जाता है। वेदों, पुराणों और शास्त्रों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि गौ-सेवा से न केवल जीवन का कल्याण होता है, बल्कि मनुष्य मोक्ष का भागी भी बनता है। महाराज जी ने देश में गोवंश के अपमान और हत्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से गौ-रक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की। महाराज ने गौ-रक्षा का संकल्प दिलाया, गीता पाठ की दी प्रेरणा इस अवसर पर महाराज ने उपस्थित जनसमूह को गौ-माता की आजीवन रक्षा और सेवा का संकल्प दिलाया। उन्होंने प्रत्येक सनातनी को प्रतिदिन श्रीमदभगवद्गीता का कम से कम एक श्लोक पढ़ने की भी प्रेरणा दी। कथा के दौरान भजनों पर भक्त झूम उठे और पूरा वातावरण ‘जय गोमाता’ के जयकारों से गूंज उठा। समिति के वरिष्ठ सदस्यों किशोर बोरसे, कन्हैयालाल राठौर और मातृशक्ति ने महाराज का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया। व्यास पीठ पर लड्डू गोपाल, श्री कष्टभंजनदेव और गौ-माता की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। कथा का संचालन राधेश्याम परमार ‘दादुभाई’ ने किया, जिसके बाद आरती हुई और भक्तों को फल प्रसादी वितरित की गई। यह कथा 20 दिसंबर (शनिवार) तक प्रतिदिन रात 8 से 10 बजे तक जारी रहेगी। गीता जयंती समारोह समिति ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें।


