गौ सेवा के नाम पर बनी कई योजनाएं, पर जमीनी हकीकत शून्य

भास्कर न्यूज | कोंडागांव जिले में गोवंश के संरक्षण को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। जिले में गोवंश के लिए न तो समुचित उपचार व्यवस्था है और न ही आपातकालीन सुविधा। हालात ऐसे हैं कि गंभीर रूप से बीमार गोवंश को इलाज के लिए गौ सेवकों को खुद कंधों पर उठाकर पशु चिकित्सालय तक ले जाना पड़ रहा है। यह पहल और मूक पशु के प्रति संवेदना दिखी शहर में बीमार सड़क पर पड़ी गाय के प्रति बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद और शहर के गौ सेवकों में जो बिना देर किये गाय को कंधे पर उठा पशु चिकित्सालय तक ले आये। मामला कोंडागांव का है, जहां एक गंभीर रूप से बीमार गाय को समय पर इलाज दिलाने के लिए स्थानीय लोगों ने मानवता की मिसाल पेश की। गाय की हालत इतनी नाजुक थी कि वह खड़े होने की स्थिति में नहीं थी। ऐसे में न तो कोई एंबुलेंस उपलब्ध थी और न ही गोवंश के लिए कोई विशेष वाहन। मजबूरी में ग्रामीणों ने गाय को कंधों पर उठाकर पशु चिकित्सालय तक पहुंचाया। सुविधाएं उपलब्ध कराने ग्रामीणों ने की मांग : ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में जल्द से जल्द गोवंश के लिए विशेष एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए, पशु चिकित्सालयों में पर्याप्त डॉक्टर व दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं, बीमार एवं घायल गोवंश के लिए त्वरित सहायता प्रणाली बनाई जाए। यह घटना केवल एक गाय की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता की कहानी है। जब तक जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ऐसे दृश्य बार-बार सामने आते रहेंगे। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा गौ सेवा एवं संरक्षण को लेकर कई योजनाओं की घोषणा की गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर नजर नहीं आ रहा। न गोवंश के लिए अलग एंबुलेंस, न पर्याप्त डॉक्टर, न ही जरूरी दवाइयों की उपलब्धता है। इस घटना के बाद ग्रामीणों और पशु प्रेमियों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इलाज न मिलता तो गोवंश की जान भी जा सकती थी। यह घटना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।

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