ग्रामीण झिरिया खोदकर प्यास बुझाने को मजबूर:गरियाबंद में सालों से चली आ रही परंपरा; लोग बोले-साफ पानी मिलेगा तो नदी क्यों जाएंगे

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में तेल नदी के किनारे बसे 17 गांवों के करीब 10 हजार लोग नदी में झिरिया खोदकर पानी पीते हैं। यह परंपरा इन गांवों की बसाहट के समय से चली आ रही है। पूरनापानी, कोदोबेड़ा, कुम्हड़ाई, परेवापाली, निष्ठीगुड़ा और दहीगांव समेत कई गांवों के 3000 परिवार साल भर इसी पानी का उपयोग करते हैं। गर्मी की तपती रेत या बारिश का तेज बहाव भी इस परंपरा को नहीं रोक पाता। स्थानीय निवासी सुशील निधि और अन्य लोगों के मुताबिक, कृत्रिम सरकारी जल स्रोतों का पानी उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं था। इस पानी से दाल नहीं पकती थी, चावल लाल हो जाता था और लगातार इस्तेमाल से स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं। इसलिए बुजुर्गों ने नदी में झिरिया खोदकर पानी निकालने का तरीका अपनाया, जो आज एक परंपरा बन गई है। आयरन फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पीएचई विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक डेढ़ दशक पहले जल स्रोतों की जांच हुई देवभोग ब्लॉक के 60 से ज्यादा गांव के 100 से ज्यादा सरकारी स्रोतों में आयरन फ्लोराइड की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई। स्कूलों के अलावा कई चिह्नांकित ग्रामों में रिमूवल प्लांट भी लगाए गए।लेकिन ग्रामीण इस पानी का उपयोग आज भी पीने के लिए नहीं करते। प्लांट से पानी ले जाती दिखी देववती बाई ने कहा कि प्लांट बंद पड़े हैं, स्वाद एवं गुणवत्ता में कोई बदलाव भी नहीं आता, जिसके कारण रिमूवल प्लांट के पानी का उपयोग भी केवल कपड़ा बर्तन धोने के लिए करते हैं। साफ पानी मिलेगा तो नदी क्यों जाएंगे ग्रामीणों की मांग पर नदी किनारे भी बोर खोदे गए,पानी भी साफ निकला पर काम करने वाले की नीयत इस बार साफ नहीं थी, ऐसे में नदी किनारे के स्रोतों से पेय जल ग्रामीणों तक पहुंचाने का काम लटका हुआ है। ग्रामीण कहते हैं कि उन्हें साफ पीने का पानी गांव में मिल जाएगा तो वे भी झिरिया का पानी लाना छोड़ देंगे। पीएचई विभाग के ईई विप्लव धृतलहरे का दावा है कि प्रभावित गांवों तक साफ पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। जल जीवन मिशन योजना की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कुल 666 गांव में योजना लागू किया गया है, केवल 3 गांव में काम शुरू नहीं किया जा सका। योजना के तहत 172 गांव में हर घर जल दिया जा रहा है। 193 गांव ऐसे है जहां आंशिक रूप से पानी की सप्लाई शुरू हुआ है। दिक्कतों को दूर कर सप्लाई नियमित दूर करने का प्रयास जारी है। 365 गांव में टंकी निर्माण शुरू किया गया, जिसमें 340 टंकी बन कर तैयार है।

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