ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को उनके स्वास्थ्य के हिसाब से मिल रहा है भोजन

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में अब अस्पतालों की तस्वीर बदल रही है, ग्रामीण क्षेत्रों के बदहाल अस्पतालों में भी कसावट लाई जा रही है। दो दिन पूर्व कटेकल्याण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेडियोग्राफर को कार्य में लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया गया था, वहीं अब जिले में चलने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों की डाइट फॉलो करवाया जा रहा है। दाल-चावल नहीं अब मरीज को उसकी बीमारी के हिसाब से भोजन दिया जा रहा है, अभी तक सिर्फ जिला अस्पताल में ही कैंटीन से गुणवत्तापूर्ण भोजन मरीजों को मिलता था, पर अब सीएचएमओ अजय रामटेके ने जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीज के डाइट प्लान के मुताबिक ही भोजन देने का निर्देश दिया है, जिसका असर भी दिख रहा है। जिले में गीदम, कटेकल्याण, किरंदुल, कुआकोंडा 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां कैंटीन संचालित होते हैं, यहां मरीजों को ही अभी तक सुबह नाश्ते में पोहा और सूजी मिलती थी और भोजन में दोनों टाइम दाल, चावल और सब्जी दिया जाता था, पर अब सुबह दूध, अंडा, ब्रेड, सूजी अनिवार्य कर दिया गया है, साथ ही भोजन में सिर्फ चावल नहीं रोटी भी शामिल किया गया है, सुबह से शाम तक का पूरा मीनू बनाया गया है। हास्पिटल में सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ है कि अब दंतेवाड़ा में अटेंडर को भी भोजन देना शुरू किया गया है, वह भी फ्री में। दंतेवाड़ा के कुआकोंडा, कटेकल्याण, गीदम और किरंदुल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ग्रामीण क्षेत्र से मरीज आते हैं, 50 से 60 किलोमीटर दूर से मरीज के साथ आने वाले अटेंडरों को ग्रामीण क्षेत्रों में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता था, जिसको देखते हुए अब 1 अटेंडर को भी अस्पताल की ही कैंटीन से चाय, नाश्ता और भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसको लेकर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुआकोंडा और कटेकल्याण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है, लापरवाही करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई भी की जा रही है। इन दोनों अस्पतालों में अधिक संख्या में रोज मरीज पहुंचते हैं, दोनों अस्पतालों में अभी भी सुविधाओं का अभाव है, अब इन अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। 24 घंटे डॉक्टरों की उपस्थित अस्पताल में अनिवार्य है, मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करने में भी रोक लगाई जा रही है, हर संभव उपचार के बाद ही मरीजों को रेफर किया जाना है। सीएचएमओ अजय रामटेके ने बताया संसाधनों की कमी नहीं है, मरीज को जिले से बाहर न जाना पड़े इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।

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