ग्रीन जोन सिर्फ फाइलों में:राजधानी में 179 में से 100 गार्डन अब भी अविकसित, नया कोई ग्रीन जोन नहीं

रायपुर में हरियाली बढ़े, इसके लिए हर मास्टर प्लान में जमीन आरक्षित की जाती है, लेकिन इसका पूरा उपयोग कभी नहीं किया गया। एक आदर्श स्थिति के लिए रायपुर में 10 से 12 प्रतिशत जमीन पर हरियाली होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में यह ढाई-तीन प्रतिशत ही है। मास्टर प्लान में उम्मीद की जाती है कि स्थानीय निकाय इस मास्टर प्लान के अनुसार रिजर्व भूमि का उपयोग ऑक्सीजोन, वनस्पति उद्यान, पक्षी विहार या वृक्षोद्यान विकसित करने में करेगा। आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए रायपुर में कार्यरत सरकारी एजेंसियां जैसे नगर निगम, रायपुर विकास प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण उद्योग आदि विभिन्न तरह की प्लानिंग करती हैं। इन एजेंसियों की प्लानिंग में ग्रीन जोन अछूता रह जाता है। राजधानी रायपुर के मास्टर प्लान 2006, 2011 और 2021 पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि शहर को हरियाली और आमोद-प्रमोद के लिए पर्याप्त जगह देने की सोच तो बनीं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी पिछड़ती दिख रही है। 2011 के मास्टर प्लान के अनुसार, शहर का क्षेत्र करीब 3,700 हेक्टेयर था। इसमें से महज 100 हेक्टेयर जमीन पार्क, खेल मैदान और ग्रीन स्पेस के लिए चिन्हित थी। यानी कुल क्षेत्रफल का सिर्फ 2.7 प्रतिशत हिस्सा ही हरियाली और खुले मैदानों को मिला। इसके बाद 2021 मास्टर प्लान में रायपुर का दायरा बढ़ाकर लगभग 16,000 हेक्टेयर कर दिया गया। करीब 1,610 हेक्टेयर (10 प्रस्तावित) जमीन को पार्क, ओपन स्पेस और आमोद-प्रमोद की श्रेणी में रखा गया। हकीकत ये है कि रायपुर शहर में आज भी वास्तविक ग्रीन कवरेज करीब तीन प्रतिशत के आस-पास ही है। 2011 के मास्टर प्लान में खारुन नदी के पास महादेवघाट को ग्रीन जोन में विकसित करने की योजना था। यह प्लान भी सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गया। 179 में से 100 गार्डन अभी भी अविकसित
रायपुर नगर निगम के अंतर्गत शहर में 179 गार्डन हैं। इनमें से करीब 120 गार्डन अभी भी अविकसित और अर्ध-विकसित हैं। रायपुर स्मार्ट सिटी ने पिछले पांच सालों में शहर के करीब दो दर्जन तालाबों को विकसित किया है। सौंदर्यीकरण में करीब 70 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। आमापारा के पास कारी तालाब को 6.75 करोड़ खर्च कर विकसित किया गया। यहां के आधे से ज्यादा पौधे मर गए। निगम अपने स्तर पर भी प्रयासरत
केंद्र से मिलने वाले फंड के अलावा नगर निगम अपने स्तर पर भी हरियाली के लिए काम कर रहा है। शहर के गार्डनों के मेंटनेंस और वहां अधिक हरियाली विकसित करने के लिए हम प्लान कर रहे हैं। हम 21 हजार पौधे लगा रहे हैं। उनकी सालभर देखरेख की जाएगी। तालाबों और वहां लगाए गए पौधों की देखरेख के लिए गैरसरकारी तथा सामाजिक संगठनों को जोड़ा जा रहा है।
– मीलन चौबे, महापौर रायपुर भास्कर एक्सपर्ट – मनीष पिल्लीवर, आर्किटेक्ट एंड टाउन प्लानर ग्रीनरी के लिए ईमानदारी से काम होना चाहिए मास्टर प्लान में समग्र रूप से ग्रीन एरिया, ग्रीन लैंड और ग्रीन बेल्ट को लेकर प्रावधान किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाना चाहिए। पिछले कुछ सालों में नया कोई ग्रीन बेल्ट डेवलप नहीं किया गया है। इसी तरह नगर निगम और नगर निवेश विभाग कालोनियों को 10 प्रतिशत एरिया ग्रीन जोन के लिए छोड़ने की शर्त पर अनुमति देते हैं। आवासीय में भी खुला क्षेत्र छोड़ने का नियम है। इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होती है। वर्तमान जरूरत को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा ग्रीन जोन विकसित करना चाहिए। 2031 के मास्टर प्लान में इसीलिए अब तक का सबसे बड़ा 3523 हेक्टेयर क्षेत्र आमोद-प्रमोद के लिए रिजर्व किया गया है। यह है कि संबंधित एजेंसियों को इस प्लान के अनुसार ग्रीनरी के लिए ईमानदारी से काम करना चाहिए।

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