भोपाल में फरवरी 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में राज्य सरकार ने 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा किया था। इसे राज्य की निवेश क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया गया। लेकिन इसके बाद सामने आए राष्ट्रीय निवेश आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं। हाल में आई बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) के दौरान देशभर में कुल 26.6 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए। इस रिपोर्ट में अकेले 25.3% निवेश प्रस्ताव आंध्र प्रदेश को मिले। यानी हर चार में से एक रुपया निवेश प्रस्ताव के रूप में आंध्र में गया। इसके बाद ओडिशा (13.1%), महाराष्ट्र (12.8%), तेलंगाना (9.5%) और गुजरात (7.1%) का स्थान रहा। मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी महज 3.2% दर्ज की गई। इस तरह, जीआईएस में किए गए बड़े दावों के बावजूद, चालू वित्त वर्ष के राष्ट्रीय निवेश आंकड़ों में मध्य प्रदेश अपेक्षाकृत पीछे दिखाई देता है। जबकि GIS में 30 लाख करोड़ के दावे थे आंध्र ने एआई-डेटा सेंटर के प्रोजेक्ट्स में मारी बाजी आंध्र आगे क्यों है?
आंध्र में 1.3 लाख करोड़ रुपए की एआई आधारित डेटा सेंटर परियोजना, 98,000 करोड़ रुपए की 1 गीगावाट डेटा सेंटर योजना, 1.1 लाख करोड़ रुपए की स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं और 82,000 करोड़ रुपए का नवीकरणीय ऊर्जा निवेश शामिल हैं। मप्र क्यों पिछड़ा?…देश में पावर (22.6%) व मेटल्स (17.3%) में निवेश बढ़ा, लेकिन मप्र को हाई-वैल्यू सेक्टरों जैसे एआई, डेटा सेंटर, मेगा एनर्जी और पोर्ट-प्रोजेक्ट्स का फायदा नहीं मिला।


