ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा दावा अनुचित रूप से खारिज करने के मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण आदेश दिया है। आयोग ने निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को 64,058 रुपए का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है। तय समय पर भुगतान न करने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मामले के अनुसार, परिवादी डॉ. पी. कुमार पिप्पल ने अपनी पत्नी के इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। उनकी पत्नी को 9 जनवरी 2024 को ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 16 जनवरी 2024 तक उनका इलाज चला। इस इलाज पर लगभग 64,000 रुपए से अधिक का खर्च आया था। इलाज के बाद, डॉ. पिप्पल ने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया। हालांकि, कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि संबंधित अस्पताल उनकी ‘बहिष्कृत’ सूची में शामिल है। आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि अस्पताल वास्तव में बहिष्कृत सूची में था या इस जानकारी से उपभोक्ता को पहले अवगत कराया गया था। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना और कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के बीमा दावा निरस्त करना अनुचित है। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपभोक्ता के बीमा दावे को गलत आधार पर निरस्त किया गया था।


