ग्वालियर RKVM सचिव डिजिटल अरेस्ट केस में कोर्ट सख्त:नागदा के बैंक मैनेजर पर गिरफ्तारी वारंट, 2.53 करोड़ की ठगी का ट्रायल तेज

ग्वालियर के रामकृष्ण मिशन आश्रम (RKVM) के तत्कालीन सचिव स्वामी सुप्रदीप्तानंद से जुड़े शहर के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड (डिजिटल अरेस्ट) मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। विशेष सत्र न्यायालय ने इस प्रकरण का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा कर फैसला सुनाने के निर्देश दिए हैं। मामले में बंधन बैंक, नागदा के सहायक बैंक प्रबंधक महेश धाकड़ की गवाही होनी है, लेकिन कई बार समन जारी होने के बावजूद वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए शनिवार को विशेष सत्र न्यायालय ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इस प्रकरण में पहले ही बंधन बैंक के एक सहायक प्रबंधक और एक महिला कैशियर को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया है कि ठगी की गई 2.53 करोड़ रुपए की रकम देश के 6 राज्यों के 15 से अधिक शहरों के 548 बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। अब तक 20 आरोपी गिरफ्तार, 548 बैंक अकाउंट की जांच ग्वालियर में 17 मार्च से 11 अप्रैल 2025 के बीच रामकृष्ण मिशन आश्रम के तत्कालीन सचिव स्वामी सुप्रदीप्तानंद को करीब 26 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 2.53 करोड़ रुपए की ठगी की गई थी। यह रकम आश्रम संस्था के तीन बैंक खातों से पहले 10 मुख्य खातों में ट्रांसफर हुई, इसके बाद इसे देशभर के 538 अन्य बैंक खातों में भेज दिया गया। मामले में क्राइम ब्रांच द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में उज्जैन के नागदा स्थित बंधन बैंक का सहायक प्रबंधक और एक महिला कैशियर भी शामिल हैं। पुलिस ने जांच पूरी कर विशेष न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। इस मामले का एक आरोपी सचिन गुप्ता अब तक हाईकोर्ट में तीन बार जमानत याचिका दाखिल कर चुका है, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही न्यायालय ने मामले का ट्रायल जल्द समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। ठगी में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट मामले में जिन बैंक खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी, वे सभी ‘म्यूल अकाउंट’ थे। म्यूल अकाउंट ऐसे खाते होते हैं, जिन्हें केवल साइबर ठगी की रकम छिपाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए खोला जाता है। इन्हें आम भाषा में ‘किराए के खाते’ कहा जाता है। साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एजेंट गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके नाम से खाते खुलवाते हैं। इन खातों में मोबाइल नंबर भी गिरोह के सदस्यों का ही रजिस्टर्ड रहता है और संचालन भी वही करते हैं। बदले में वास्तविक खाता धारक को हर महीने 4 से 5 हजार रुपए किराए के रूप में दिए जाते हैं। ऐसे समझिए पूरा मामला ग्वालियर के रामकृष्ण मिशन आश्रम के तत्कालीन सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को 17 मार्च को पहली बार कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को नासिक पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ नासिक थाने में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज है। जब सुप्रदिप्तानंद ने पूछा कि मामला क्या है, तो ठग ने कहा- “आप नरेश गोयल को जानते हैं?” इनकार करने पर उसने बताया कि नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़ा गया है और उसके पास से जो बैंक अकाउंट मिला है, वह स्वामी सुप्रदिप्तानंद के नाम और आधार कार्ड पर दर्ज है। इसके बाद फर्जी इंस्पेक्टर ने उनके व्हाट्सएप पर कैनरा बैंक के एक खाते की डिटेल, पीडीएफ और स्टेटमेंट भेजी, जिसमें उस खाते से करीब 20 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन दिखाया गया था। खाता सुप्रदिप्तानंद के आधार से लिंक बताया गया। स्वामी सुप्रदिप्तानंद ने इस खाते से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया। इस पर ठग ने जांच शुरू करने की बात कही और इसी बहाने आश्रम के सभी बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद उसने प्रवर्तन एजेंसी और अन्य संस्थाओं के फर्जी दस्तावेज भेजे, जिनमें सुप्रदिप्तानंद का नाम दर्ज था। जांच के नाम पर ठगों ने आश्रम के फंड से 2 करोड़ 52 लाख 99 हजार रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने पर यदि पैसा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा नहीं पाया गया तो रकम वापस कर दी जाएगी। जब स्वामी सुप्रदिप्तानंद को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने क्राइम ब्रांच ग्वालियर पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

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