राजबाड़ा से लगे होलकर वंश का निवास रहे शिव विलास पैलेस के ही एक प्लॉट को लेकर जो फर्जी वसीयत और फिर नामांतरण का मामला सामने आया है, उससे विभाग में हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ जिला पंजीयक ने विभाग में रिकॉर्ड की गड़बड़ी करने वाले रिकॉर्ड रूम के प्रभारी मर्दन सिंह रावत (सहायक ग्रेड-2) को वहां से हटा दिया है। साथ ही यहां के कुछ अन्य कर्मचारियों को भी बदला है। इधर, नगर निगम ने जोन 3 के राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों की फाइल भी बुला ली है। जल्द ही इन पर कार्रवाई होगी। वरिष्ठ जिला पंजीयक दीपक कुमार शर्मा ने बताया कलेक्टर आशीष सिंह के आदेश पर रावत के खिलाफ विभागीय जांच की है। उसे रिकॉर्ड शाखा से हटा भी दिया है। इसी के साथ रिकॉर्ड रूम में सीसीटीवी की निगरानी बढ़ा दी है। यहां कुल 25 कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही एक विभागीय समिति भी गठित की गई है, जो इस तरह के संदिग्ध मामलों की जांच करेगी। निगम ने भी रजिस्ट्री नामांतरण करने से पहले दस्तावेज नहीं जांचे
पूरे मामले में पंजीयन विभाग में तो रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई ही, निगम ने भी इतनी पुरानी रजिस्ट्री का नामांतरण करने में न पंजीयन विभाग से पूछा और न ही दस्तावेजों की पड़ताल की। आवेदक का नाम, पता, आधार तक वैरिफाई नहीं किया, न ही रसीद कटवाने वाले, जिसके नाम प्रॉपर्टी हो रही है, उसका वैरिफिकेशन किया। हालांकि निगम का कहना है कि नामांतरण के हर दिन कई केस आते हैं, हम किसी को वैरिफाई नहीं कर सकते, लेकिन पुराने मामलों में जरूर अब सतर्कता बरती जाएगी। कलेक्टर का 3 विभागों को पत्र
कलेक्टर आशीष सिंह ने निगमायुक्त को केस का हवाला देते हुए कहा कि निगम के जोन 3 के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना ही शिव विलास पैलेस के प्लॉट का नामांतरण कर दिया। महानिरीक्षक पंजीयन काे लिखा कि रजिस्ट्री के दस्तावेज प्रथम दृष्टया संदेहास्पद तथा कूटरचित रूप से तैयार किए गए और रिकॉर्ड रूम में गलत ढंग से लगाए गए। एमजी रोड पुलिस को भी पूरे मामले की जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई के लिए कहा है। एसडीएम की साइन-सील लगाकर फाइल बढ़ाने वाले वकील पर होगी एफआईआर जूनी इंदौर एसडीएम के नाम पर खुद ही सील और साइन करने वाले वकील को प्रशासन दो बार पक्ष रखने के लिए बुला चुका है। दोनों बार वह सामने नहीं आया। अब प्रशासन उसके खिलाफ एफआईआर की तैयारी कर रहा है। एसडीएम घनश्याम धनगर ने बताया कि मामले की पूरी पड़ताल कर ली गई है। संबंधित वकील को भी दो बार नोटिस देकर पक्ष रखने के लिए बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आया। इसलिए अब इस मामले में एफआईआर की कार्रवाई की जाएगी। मालूम हो, चार दिन पहले यह मामला तब सामने आया, जब असली आवेदक वकील के बजाय खुद एसडीएम के पास फाइल लेकर पहुंच गया कि आपने अलग-अलग समय में सुनवाई की और यह पक्ष सुना। एसडीएम खुद भी चौंक गए थे कि आखिर यह कब हुआ। महीनों तक फाइल को पेंडिंग रखा, दो अधीक्षण यंत्री को नोटिस, दो निलंबित फाइलों को पेंडिंग रखना जनकार्य और ड्रेनेज विभाग के प्रभारी अधीक्षक को भारी पड़ गया। फाइल पेंडिंग रखने और भुगतान के प्रकरण में देरी करने की शिकायत पर सोमवार को निगमायुक्त शिवम वर्मा ने जनकार्य विभाग के अधीक्षण यंत्री प्रशांत दिघे और ड्रेनेज विभाग के प्रभारी अधीक्षक योगेंद्र वर्मा को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ जांच समिति भी गठित कर दी गई है। इसी मामले में अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी, कार्यपालन यंत्री मनोज जैन, ड्रेनेज विभाग के अधीक्षण यंत्री विवेश जैन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विकास कार्य से संबंधित नस्तियों के भुगतान संबंधित प्रकरण में विलंब करने की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। दिघे का मूलपद क्लर्क और वर्मा का मूलपद दरोगा का है। 2 माह तक केस लंबित रखे दोनों ही विभागों में एक से दो माह तक प्रकरण लंबित रखे गए। जब जानकारी मांगी गई तो दोनों ही संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पूर्व में ही आदेश था कि तीन दिन की समयावधि में जांच कर प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए प्रेषित करें।


