छत्तीसगढ़ में पहली बार सुविधा मिल रही… योजनाओं के साथ स्कूलों में प्रवेश में मदद मिलेगी छत्तीसगढ़ में पहली बार सरकारी और निजी अस्पतालों में जन्म के बाद शिशुओं का आधार कार्ड निशुल्क वहीं बन जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए नया सॉफ्टवेयर लॉन्च किया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की ओर से ये सुविधा ऑनलाइन शुरू कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन और वहां के तकनीकी स्टाफ को बच्चों का आधार कार्ड कैसे बनेगा, इसकी जानकारी देने पहले चरण की ट्रेनिंग भी दे दी गई है। माता-पिता के आधार कार्ड में दर्ज जानकारी के अनुसार शिशु का आधार के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा। अस्पतालों में इसके लिए एक खास डिवाइस भी लगाया जा रहा है। राजधानी रायपुर के कालीबाड़ी स्थित मातृत्व एवं चाइल्ड केयर अस्पताल के अलावा जिले के कुछ सरकारी अस्पतालों में यह सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी डिवाइस से बच्चे के बायोमेट्रिक निशान भी लिए जाएंगे।
ऑनलाइन आवेदन होने के बाद नया आधार 7 से 10 दिन में बनकर माता-पिता के दिए पते पर घर पहुंचा दिया जाएगा। बच्चे को एक बार जो आधार नंबर दिया जाएगा, वही उनका स्थायी आधार नंबर होगा। यानी उसे कभी बदलना नहीं पड़ेगा। पांच साल बाद केवल बच्चे का फोटो और बायोमेट्रिक अपडेट किया जाएगा। ये फायदे: स्कूल में प्रवेश, सुकन्या जैसी योजना का लाभ अभी स्कूलों में प्रवेश के समय बच्चे का आधार कार्ड जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा सुकन्या जैसी कई शासकीय योजनाओं के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने जन्म के तुरंत बाद ही कार्ड बनाने की सुविधा शुरू की है। अधिकतर समय आधार कार्ड की जरूरत होने पर ही उसे बनाया जाता है। उस समय कई तरह की औपचारिकता के कारण परेशानी होती है। इसलिए कई लोग तो बच्चे के जन्म के एक से दो साल तक आधार कार्ड बनाते ही नहीं है। अस्पताल में माता-पिता को केवल अपने-अपने आधार कार्ड की फोटो कॉपी जमा करनी है। अस्पतालों में लगेंगे ये डिवाइस
योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए प्रत्येक अस्पताल में चाइल्ड एनरोलमेंट लाइट क्लाइंट किट, एंड्रॉइड टेबलेट और फिंगरप्रिंट डिवाइस लगाए जाएंगे। कुछ जगह इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह सभी डिवाइस केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर लगातार इसकी समीक्षा करेंगे। ताकि मॉनीटरिंग होती रहे कि सभी बच्चों के आधार कार्ड बन रहे या नहीं? अस्पतालों से बच्चों का जो डेटा भेजा जा रहा है उसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के साथ समन्वय बनाकर जल्द से जल्द कार्ड जारी कराने की कोशिश भी की जा रही है। अफसरों का दावा है कि कुछ ही महीने में राज्य के हर जिले में इस योजना को लागू कर दिया जाएगा।”


