राजस्थान में जनगणना के पहले चरण की शुरुआत मई से होगी। इसमें मकानों की गणना की जाएगी। वहीं, इस बार सरकार ने जनगणना में 33 तरह के सवाल रखे हैं। इन पर जानकारी जुटाई जाएगी। इनमें पूछा जाएगा कि घर में कौन से (गेंहू, बाजरा, चावल या अन्य) अनाज का खाने में सबसे ज्यादा उपयोग होता है। मकान की हालत कैसी है, उसकी छत्त कैसे (पक्की या कच्ची) बनी है, मकान का फर्श है या नहीं? इनमें घर स्थिति से लेकर खाने में उपयोग किए जाने वाले अनाज, उपयोग होने वाले टेलीविजन, रेडियो, ट्रांजिस्टर, फोन, वाहन, घर में कमरों की संख्या, रसोई गैस कनेक्शन समेत कुल 33 सवाल हैं। आरक्षित वर्ग का भी डेटा जुटेगा इस जनगणना के माध्यम से सरकार इस बार एरिया वाइज आरक्षित वर्ग का भी डेटा जुटाएगी। इन 33 सवाल में 12वें नंबर का सवाल इसी से जुड़ा है। इसमें पूछा जाएगा कि क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य किसी वर्ग से संबंधित है। इस डेट के जरिए सरकार के तरह से देश में SC, ST की जनगणना का भी आंकलन करेगी। क्योंकि वर्तमान में सरकार के पास जो डेटा है, वह 2011 का है। उसी के अनुरूप स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में इन वर्ग को आरक्षण दिया जा रहा है। चावल ज्यादा खाते है या गेंहू इस जनगणना में सरकार आमजन से उनके उपयोग किए जाने वाले अनाज की भी जानकारी लेगी। सूत्रों का कहना है कि सरकार इससे एक आंकलन करना चाहती है कि देश में किस खाद्यान (अनाज) का कितने फीसदी लोग उपयोग करते हैं। इसलिए इस बार सवाल पूछा जाएगा, कि घर में कौन से (गेंहू, बाजरा, चावल या अन्य) अनाज का खाने में सबसे ज्यादा उपयोग होता है। घर की उपलब्धता भी करेंगे सुनिश्चित देशभर में केन्द्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण और अरबन एरिया में गरीब वर्ग को पक्के मकान बनाने के लिए सहायता उपलब्ध करवा रही है। सरकार का उदेश्य है कि हर परिवार को पक्का मकान (छत) उपलब्ध हो। इस जनगणना के जरिए सरकार से सुनिश्चित करेगी कि जो परिवार देश में है, उनमें से कितने परिवार के पास खुद का पक्का मकान है, कितने के पास नहीं। यही कारण है कि सरकार ने जनगणना में भवन से संबंधित 7 सवाल इसमें सम्मलित किए है। इनमें सबसे प्रमुख सवाल कि क्या मकान परिवार के स्वामित्व का है या नहीं। इसके अलावा मकान की हालत कैसी है, उसकी छत्त कैसे (पक्की या कच्ची) बनी है, मकान का फर्श (कच्चा है या पक्का), उसमें शौचालय है या नहीं? मकान में कितने कमरे है?, मकान की दीवरें कैसी (कच्ची या पक्की) है। समेत अन्य सवाल है। ये सवाल भी शामिल सरकार ने इस बार मोबाइल फोन, इंटरनेट की उपयोगिता से संबंधित सवालों को भी जनगणना में रखा है। इसके लिए ये डेटा मिलेगा कि वर्तमान में कितने लोग इंटरनेट सेवा का उपयोग कर रहे है। साथ में एक घर में लैटटॉप, कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन की औसत संख्या कितनी है। इसके अलावा सरकार घरों में एलपीजी कनेक्शन पर भी डेटा जनगणना के जरिए जुटाएगी। वर्तमान में कितने परिवारों के पास एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है। कितने के पास नहीं ये डेटा भी सरकार के अहम होगा।


