घर से निकलकर महिलाओं का खेल मैदान में उतरना समाज की प्रगति का प्रतीक: चन्द्राकर

महिलाओं में खेल प्रतिभा को निखारने और उन्हें शारीरिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा विकासखंड स्तरीय महिला खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेमचा के खेल मैदान में किया गया। 6 फरवरी को समापन के दौरान प्रतियोगिता में दो आयु वर्गों (9-18 वर्ष और 18-35 वर्ष) की महिला खिलाड़ियों ने अपनी खेल कुशलता और टीम वर्क का परिचय दिया। समापन समारोह की मुख्य अतिथि जनपद सदस्य संगीता राहुल चंद्राकर ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कि महिलाओं का मैदान में उतरना समाज की प्रगति का प्रतीक है। हार-जीत से बढ़कर खेल भावना महत्वपूर्ण है। खेल के मैदान अब केवल प्रतिस्पर्धा का केंद्र नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव के गवाह बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं मैदान में उतरती हैं, तो वे केवल पदक नहीं जीततीं, बल्कि समाज की रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए प्रगति का एक नया अध्याय लिखती हैं। प्रतियोगिता के दौरान कई ऐसे पल आए जहां हारने वाली टीम ने जीतने वाली टीम को गले लगाकर बधाई दी। 9 वर्ष की बालिकाओं से लेकर 35 वर्ष की गृहणियों तक का ट्रैक पर दौड़ना और रस्साकशी में जोर लगाना, इस बात का प्रमाण है कि महासमुंद जिले में खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। मैदान की धूल और पसीने के बीच इन महिलाओं का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के स्वास्थ्य को अक्सर प्राथमिकता नहीं मिलती, लेकिन ऐसे आयोजनों से वे अपनी शारीरिक क्षमता को पहचान रही हैं। भोरिंग की ममता धीवर जैसी खिलाड़ियों ने ट्रिपल गोल्ड जीतकर यह साबित कर दिया, कि ग्रामीण प्रतिभाओं को यदि सही मंच मिले, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर चमकने का माद्दा रखती हैं। इस मौके पर खेल अधिकारी मनोज धृतलहरे, विधायक प्रतिनिधि रविकांत चंद्राकर, और प्राचार्य एसएल पाटकर, आयोजन प्रभारी डॉ. सेवन दास मानिकपुरी सहित अन्य मौजूद थे। ममता ने किया बेहतर प्रदर्शन: रस्साकसी व खो-खो दोनों ही खेलों में बेमचा की महिलाओं ने प्रथम स्थान हासिल कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। महिलाओं को सामूहिक पहचान देने आयोजन: चंद्राकर ने बताया कि आयोजन का असली उद्देश्य केवल प्रथम या द्वितीय आना नहीं, बल्कि उन महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर एक सामूहिक पहचान देना था। बेमचा के खेल मैदान पर दिखी वह ऊर्जा इस बात की तस्दीक करती है कि अब महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

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