घाटशिला की दो बड़ी जल योजना पर ताला, सूखीं पानी की उम्मीदें

राजेश कुमार सिंह | घाटशिला घाटशिला प्रखंड की दो प्रमुख जलापूर्ति योजनाएं बड़ाजुड़ी जलापूर्ति योजना और कुलियाना जलापूर्ति योजना सरकारी उदासीनता और फंड की कमी के कारण अधर में लटक गई हैं। इन योजनाओं से हजारों ग्रामीणों को पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल मुहैया कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में ये दोनों परियोजनाएं वर्षों से ठप पड़ी हैं। इन दोनों जलापूर्ति योजनाओं का ठप पड़ना न सिर्फ सरकारी योजनाओं की निष्क्रियता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार लाखों रुपए की सार्वजनिक संपत्ति लापरवाही के कारण बर्बाद हो रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस ओर गंभीरता दिखाता है और कब इन योजनाओं को फिर से शुरू किया जाता है। 110 करोड़ की कुलियाना जलापूर्ति योजना बेकार सामग्री और वीरान स्थल में तब्दील : जल जीवन मिशन के तहत 2021 में शुरू हुई कुलियाना जलापूर्ति योजना की लागत 110 करोड़ रुपये थी। इस योजना के तहत घाटशिला प्रखंड के 17 पंचायतों को सुवर्णरेखा नदी के जल से पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति होनी थी। लेकिन फंड के अभाव में निर्माण कार्य बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेका कंपनी के लोग कई महीनों से नजर नहीं आए हैं। योजना के तहत सुवर्णरेखा नदी के किनारे इंटेकवेल का निर्माण होना था, साथ ही दो एकड़ क्षेत्र में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बनना था। लेकिन अब हालत यह है कि निर्माण सामग्री खुले में पड़ी-पड़ी खराब हो चुकी है। सरिया नदी किनारे जंग खा गया है और विद्यालय भवन के एक खिड़की रहित कमरे में वर्षों से पड़ा सीमेंट अब पत्थर बन चुका है। ठेकेदार के फरार होने से 12 करोड़ की बड़ाजुड़ी जलापूर्ति योजना अधूरी : बड़ाजुड़ी जलापूर्ति योजना, जिसकी लागत करीब 12 करोड़ रुपये है, पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चली गई है। दुमका की विनोद लाल कंपनी को ठेका मिला था, लेकिन काम अधूरा छोड़कर कंपनी फरार हो गई। विभाग ने अब इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इस योजना से बड़ाजुड़ी पंचायत के 6 और काशिदा पंचायत के 5 गांवों को जलापूर्ति होनी थी। अमाईनगर में इंटेकवेल का निर्माण अधूरा है, और दो जल टंकियों का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ – जिनकी क्षमता क्रमशः 2 लाख 16 हजार लीटर और 1 लाख 39 हजार 700 लीटर तय की गई थी। प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामीणों में नाराजगी : लाखों रुपए की सामग्री नष्ट हो चुकी है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों की पीने के पानी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। विभाग का दावा फिर से होगा टेंडर : इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग घाटशिला के जेई कैलाश राम ने बताया कि इस योजना को पूरा कराने के लिए फिर से टेंडर किया जाना है। इसके लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। पूर्व के ठेका कंपनी द्वारा कराए गए काम की मापी कर ली गई है। जल्द ही टेंडर करने के बाद योजना को पूरा कराया जाएगा।

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