अब मरीजों को सरकारी अस्पतालों में मेडिकल मशीनों के खराब होने पर हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ पीजीआई सहित सभी बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में नई गाइडलाइंस लागू कर दी हैं। नई व्यवस्था के तहत अब मेडिकल उपकरणों की वारंटी और मेंटेनेंस पहले से तय होंगे। इसके साथ ही महंगे कंज्यूमेबल्स (जैसे टेस्ट किट, कार्ट्रिज आदि) की कीमतें भी फिक्स कर दी जाएंगी। पहले मशीन खराब होने पर अस्पतालों को कंपनियों से बार-बार संपर्क करना पड़ता था। हर बार स्पेयर पार्ट्स और कंज्यूमेबल्स की कीमतें अलग बताई जाती थीं, जिससे खरीद और मरम्मत में हफ्तों की देरी हो जाती थी। इस वजह से मरीजों को निजी लैब्स में टेस्ट कराने पड़ते थे और सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मशीनें बेकार पड़ी रहती थीं। तय कीमतों से पारदर्शिता
नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को उपकरणों के कंज्यूमेबल्स और स्पेयर पार्ट्स की पूरी सूची उनकी तय कीमतों के साथ पहले ही जमा करनी होगी। इससे अस्पतालों में पारदर्शिता आएगी और मशीनों की मरम्मत समय पर होगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हर साल कई करोड़ के उपकरण सिर्फ समय पर सर्विस न मिलने से बेकार हो जाते हैं।


