चंडीगढ़ गायों की मौत मामला, केंद्र-प्रशासन को नोटिस जारी:हाईकोर्ट में 9 मार्च सुनवाई, एनिमलस कार्कस डिस्पोजल प्लांट में मिले शव

चंडीगढ़ के रायपुर कलां स्थित गौशाला में करीब 50 मवेशियों की कथित मौत को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी किए हैं। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, चंडीगढ़ नगर निगम और भारत सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। मामले के सामने आने के बाद चंडीगढ़ नगर निगम ने एक स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी और रायपुर कलां स्थित पशु बाड़े के एक निरीक्षक को निलंबित कर दिया।इसके अलावा पशु डॉक्टर, सफाई इंस्पेक्टर, सुपरवाइजर समेत कई ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। वहीं, चंडीगढ़ के एडिशन डिप्टी कमिशसन द्वारा पूरे मामले की मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है और अब मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी। एनिमलस कार्कस डिस्पोजल प्लांट में मिले शव इससे पहले 16 जनवरी को जस्टिस संजय वशिष्ठ ने प्रारंभिक आदेश में कहा था कि लगभग सभी क्षेत्रीय अखबारों में यह खबर छपी थी कि चंडीगढ़ के माखन माजरा स्थित एनिमलस कार्कस डिस्पोजल प्लांट में बड़ी संख्या में गायों के शव मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इसे आगे सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के पास भेज दिया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रायपुर कलां गौशाला में 50 से 60 मवेशी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए। यह गौशाला चंडीगढ़ नगर निगम के अंतर्गत आती है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि कई शव बुरी हालत में मिले थे। कई गायों के शवों से आंखें, खुर और सींग गायब थे। इस वजह से साजिश और अवैध तस्करी की आशंका जताई गई। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि रायपुर कलां में 12 सितंबर 2025 को 1.79 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया शव डिस्पोजल सेंटर, जो 5 साल के रखरखाव समझौते के तहत था, एक हफ्ते से ज्यादा समय तक बंद रहा। इसके कारण शव जमा होते चले गए और गौशाला की हालत और खराब हो गई। मीडिया रिपोर्टों में गौशाला में रखे मवेशियों की बेहद खराब स्थिति भी सामने आई। एफआईआर और प्रशासनिक कार्रवाई
16 जनवरी को आई रिपोर्टों के मुताबिक, माखन माजरा की गौशाला प्रबंधन समिति की शिकायत पर मौलीजागरां थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण कानून की धारा 11 के तहत दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया कि सही चारा, पीने का पानी, इलाज और रहने की ठीक व्यवस्था न होने की वजह से कई मवेशियों की मौत हो गई।13 जनवरी को हुई जांच में पाया गया कि मवेशी ठंड, भूख और बीमारी से परेशान थे। वहां उनका इलाज करने के लिए कोई पशु डॉक्टर या इलाज की सुविधा मौजूद नहीं थी।

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