चंडीगढ़ पूर्व DGP मानहानि केस:आरोपियों का पता नहीं, FIR में 3 पुलिसकर्मियों के नाम; एक साल बीता

चंडीगढ़ पुलिस जो बड़े-बड़े मामलों को सॉल्व करने और बड़े अपराधियों को पकड़ने का दावा करती है, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व डीजीपी सुरेंद्र यादव को बदनाम करने वालों को पकड़ना तो दूर, उनका एक भी सुराग नहीं जुटा पाई है। जबकि अगर एफआईआर की बात करें तो जो क्राइम ब्रांच में दर्ज की गई है, उसमें तीनों मुलाजिमों के नाम जसपाल, ओमप्रकाश और एक महिला जसविंदर का नाम लिखा गया है, मगर ये चंडीगढ़ पुलिस डिपार्टमेंट में किस रैंक पर हैं और कहां तैनात हैं, फिलहाल इसका भी खुलासा नहीं किया गया है। क्राइम ब्रांच अब खुद सवालों के घेरे में है कि वह अपने ही तीन पुलिसकर्मियों को ढूंढने में नाकाम रही है, जिन पर चंडीगढ़ के पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप है। हालांकि, यह मामला अभी तक केवल कागजों तक ही सीमित है। वहीं मामले में चंडीगढ़ के डीजीपी डॉक्टर सागर प्रीत हुड्डा से बात करने की कोशिश की गई, तो उनके पीएसओ ने मोबाइल फोन उठाया और कहा कि साहब बिजी हैं, आप मैसेज दे दीजिए, साहब तक पहुंच जाएगा। उन्हें केस के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई। काफी देर बाद जब जवाब के लिए फिर से फोन किया गया, तो पीएसओ ने फोन उठाते हुए जवाब दिया कि आपका मैसेज साहब तक पहुंच गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। चंडीगढ़ के किस मुलाजिम ने भेजा था लेटर
वायरल लेटर की जांच में मोहाली के फॉर्म हाउस का पता चला। वहां की सीसीटीवी फुटेज चेक की तो पाया कि हर 15 दिन बाद फुटेज ऑटोमैटिकली डिलीट हो जाती है। इससे जांच धीमी पड़ गई। लेकिन शक के आधार पर मुलाजिमों की कॉल डिटेल निकलवाई गई तो कई मोबाइल फॉर्म हाउस की लोकेशन के मिले। जांच में यह भी पता चला कि कौन सा मुलाजिम किस गाड़ी में किसके साथ फॉर्म हाउस पहुंचा था। किस लैपटॉप से यह लेटर भेजा गया, उसका आईपी एड्रेस भी सामने आ गया। यह सारा रिकॉर्ड पुख्ता करने के बाद एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन उस मुलाजिम के नाम का खुलासा भी नहीं किया गया जिसके जरिए लेटर भेजा गया था। मोहाली में अधिकारी के फॉर्म हाउस पर रची साजिश
अफसरों को बदनाम करने की साजिश रचने वालों में एक-दो नहीं, बल्कि चंडीगढ़ पुलिस के दर्जन भर मुलाजिम शामिल हैं। यह सभी मोहाली में एक अफसर के फार्म हाउस पर पहुंचे थे और वहीं साजिश रची गई थी। कुछ दिनों बाद ही डीजीपी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर एक लेटर सामने आया। जिस पर काफी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। गुमराह करने के लिए लेटर के आखिर में एक रिटायर्ड अफसर के साइन थे। जांच में साफ हो गया था कि साइन जाली हैं। डीजीपी की सख्ती से परेशान
वर्ष 1997 बैच के IPS ऑफिसर सुरेंद्र सिंह यादव ने बतौर डीजीपी कार्यभार संभालने के बाद हर संपर्क सभा, पब्लिक मीटिंग और अफसरों से मीटिंग में कहा था कि अनी ड्यूटी ईमानदारी से करो। क्रिमिनल्स पर नकेल कसो, इमिग्रेशन ठगों और नशा बेचने वालों को पकड़ो। सारे मुलाजिम एक ही परिवार हैं। किसी को दिक्कत है तो आकर बताए। इसके बावजूद कुछ मुलाजिमों ने गड़बड़ी की, पकड़े गए और उन पर कार्रवाई हुई। कुछ चुनिंदा मुलाजिमों, विशेषकर इंस्पेक्टर रैंक के कुछ अफसरों को डीजीपी और अन्य सीनियर्स की यह सख्ती रास नहीं आ रही थी।जब डीजीपी सुरेंद्र यादव का भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रवैया सामने आया तो क्राइम ब्रांच ने कॉन्स्टेबल युद्धबीर और शहर के पूर्व मेयर कुलदीप पर केस दर्ज किया। हालांकि केस दर्ज होने के समय वे मेयर थे। डीएसपी एसपीएस सोंधी, इंस्पेक्टर जसमिंदर, सीनियर कॉन्स्टेबल समुंदर, हेड कॉन्स्टेबल सतीश, सीनियर कॉन्स्टेबल प्रदीप और कॉन्स्टेबल सुरिंदर पर भी केस दर्ज किया गया। 2 साल का था कार्यकाल
डीजीपी सुरेंद्र सिंह यादव ने चंडीगढ़ पुलिस में सिर्फ 13 महीने ही बिताए थे। वे 2 साल के लिए नियुक्त हुए थे, लेकिन कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया। उनके ट्रांसफर पर पुलिस विभाग में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों में उनके कड़े अनुशासन के कारण राहत की भावना देखी गई, जबकि कुछ उनके कार्यकाल को प्रभावी बता रहे हैं। आईजी मामले से अनजान वहीं जब चंडीगढ़ के पूर्व डीजीपी सुरेंद्र यादव काे बदनाम करने के मामले में दर्ज एफआईआर का स्टेटस पता करने के लिए चंडीगढ के आईजी पुषपिंदर कुमार से बात की तो उन्होंने कि ऐसा मामला उनके ध्यान में नही है कि कोई दर्ज किया गया था।

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