चंडीगढ़ फर्नीचर मार्केट मामले में हाईकोर्ट सख्त:पूछा- दुकानें क्यों हटाईं, जवाब तलब किया, प्रशासन से नया प्लान मांगा

चंडीगढ़ में फर्नीचर मार्केट से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास की मांग पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाई है और याचिकाकर्ताओं के दावों की जांच कर पुनर्वास पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जसविंदरपाल सिंह बनाम यूटी चंडीगढ़ केस में जस्टिस दीपक सिब्बल और लपीता बनर्जी की डबल बेंच में सुना गया। दुकानदारों की ओर से सीनियर एडवोकेट अक्षय भान ने दलील दी कि वे पिछले 40-45 वर्षों से वहां दुकान चला रहे हैं और अचानक हटाने से उन्हें बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सेक्टर-56 की बल्क मार्केट में इन्हें पुनर्वासित किया जा सकता है। वहीं प्रशासन की ओर से स्टेट काउंसिल अमित झांजी ने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता अवैध कब्जाधारी (trespassers) हैं और सेक्टर-56 की मार्केट अभी केवल कागजों पर है, जहां भविष्य में मार्बल मार्केट बनाई जानी है। वह स्थान नीलामी के लिए तय है, इसलिए कोई पक्का आश्वासन नहीं दिया जा सकता। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी दुकानदार फर्जी नहीं हो सकते, कुछ वास्तविक और लंबे समय से व्यवसाय कर रहे लोग भी हो सकते हैं। अदालत ने प्रशासन का 9 जनवरी 2025 का आदेश रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के दावों की एक महीने के भीतर जांच की जाए और पुनर्वास पर विचार किया जाए। यह आदेश चंडीगढ़ के लंबे समय से दुकानदार रहे लोगों के लिए राहत की उम्मीद बन गया है। 20 जुलाई प्रशासन ने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए 20 जुलाई को दुकानों को तोड़ा जा चुका है। उसे लेकर पहले से ही फर्नीचर मार्केट के कारोबारियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। चंडीगढ़ डीसी ने कहा करीब 400 करोड़ रुपए कीमत वाली इस जमीन का प्रशासन ने साल 2002 में अधिग्रहण किया था। कारोबारियों का कहना है कि उस समय वे लोग वहां किराए के तौर पर मौजूद थे। जमीन के मालिकों को किराया दिया जाता था। हालांकि जब जमीन अधिग्रहण किया गया तो हमें कोई जानकारी नहीं हो पाई। बोले – अब अपने वादे से मुकर रहा प्रशासन कारोबारियों का कहना है कि 30 जनवरी को प्रशासन के साथ बैठक हुई थी। उस समय मांग की गई थी कि जगह को खाली कराने से पहले हमें डीसी रेट पर बल्क मार्केट में जगह उपलब्ध कराई जाए। सेक्टर-56 में तैयार हो रहे बल्क मार्केट में प्रशासन ने हमें जगह देने का मौखिक वादा भी किया था। तब हमसे कहा गया था कि इस मामले में बात के लिए व्यापारियों को बुलाया जाएगा। 6 महीने तक कोई बुलावा नहीं आया। अब अचानक बाजार में जगह खाली करने के लिए मुनादी कराई जाने लगी है। 400 करोड़ की जमीन करवाई खाली डीसी निशांत यादव ने कहा कि काफी लंबे समय से 10-12 एकड़ जमीन में गैर कानूनी तरीके से फर्नीचर मार्किट बनी हुई थी। इस जमीन की बाजार कीमत करीब 400 करोड़ है, जिसे अब इंजीनियरिंग विभाग को सौंपा गया है। ताकि आगे चलकर इस जमीन का इस्तेमाल शहर की सड़क, सीवरेज, पार्क और दूसरी विकास योजनाओं में किया जा सके। यह जमीन चंडीगढ़ शहर के आगे बढ़ने के तीसरे चरण का हिस्सा है और जगह के हिसाब से बहुत जरूरी मानी जा रही है।

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