चंडीगढ़ में सरकारी मकानों की बदहाल हालत और आवंटन में भेदभाव को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्या कोर्ट के कर्मचारियों के लिए अलग से हाउसिंग पूल बनाने पर विचार किया गया है? साथ ही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि हाउस अलॉटमेंट कमेटी में सिर्फ एक ही ज्यूडिशियल मेंबर क्यों है। मामला एक मीडिया में छपी रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ के सेक्टर-22, 24, 27, 29 और 33 जैसे क्षेत्रों में हाईकोर्ट कर्मचारियों को आवंटित मकानों की हालत काफी खराब है। कहीं दीवारें टूटी हुई हैं तो कहीं प्लास्टर उखड़ा हुआ है। छतों से सीमेंट की धूल गिर रही है और दरवाजे-खिड़कियों में दीमक लग चुकी है। आसपास की घास इतनी बड़ी हो चुकी है कि सांप और अन्य जानवरों का खतरा बना रहता है। बाथरूम के दरवाजे झूल रहे हैं और रसोई भी जर्जर स्थिति में है। एक ज्यूडिशियल मेंबर बाकी अफसर यूटी प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया गया। जिसमें बताया गया कि हाउस अलॉटमेंट कमेटी में 6 सदस्य हैं, जिनमें से एक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट और यूटी प्रशासन के कर्मचारियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची के आधार पर मकानों का आवंटन किया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “जब 6 में से केवल एक सदस्य ज्यूडिशियल है, तो यह मेजोरिटी तो प्रशासन की ही होगी। क्या यह उचित है?” नए अलॉटमेंट सचिव की नियुक्ति इस बीच यूटी प्रशासन ने हाउस अलॉटमेंट कमेटी में नया सचिव नियुक्त किया है। अखिल कुमार को अतिरिक्त सचिव बनाया गया है, जबकि सौरभ कुमार अरोड़ा को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही डॉ. ऋचा को रजिस्ट्रार, को-ऑपरेटिव सोसाइटी और ईशा कांबोज को म्यूजियम एवं आर्ट गैलरी का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।


