चंडीगढ़ में पिता की हत्या केस में बेटी बरी:कोर्ट में मुकरा गवाह, 2 साल जेल में रही बेटी, FIR और सबूतों पर उठाए सवाल

चंडीगढ़ में अपने ही पिता सुमेई लाल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार बेटी आशा को कोर्ट ने बरी कर दिया है। यह फैसला तब आया, जब केस का मुख्य गवाह गुलाब सिंह कोर्ट में अपने बयान से मुकर गया। गुलाब ने साफ कहा कि उसने न तो आशा को अपने पिता की हत्या करते देखा और न ही उसने पुलिस को कभी ऐसा कोई बयान दिया था। कोर्ट में गवाही के दौरान मुख्य गवाह के पलटने के बाद चंडीगढ़ जिला अदालत ने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब मुख्य गवाह ही आरोपों की पुष्टि नहीं कर रहा, तो ऐसे में आशा को इतने लंबे समय तक जेल में रखना गंभीर सवाल खड़े करता है। आशा करीब 2 साल 2 महीने तक न्यायिक हिरासत में रही। वकील ने FIR और सबूतों पर उठाए सवाल आशा की ओर से चंडीगढ़ जिला अदालत में वकील गुरदित सिंह सैनी ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस चाकू को हत्या का हथियार बताया गया, वह बहुत छोटा और रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान्य चाकू था। ऐसे चाकू से जानलेवा हमला होने की बात संदेह के घेरे में है। वकील ने यह भी दलील दी कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार केवल एक ही वार किया गया था। यदि कोई बेटी अपने पिता की हत्या करने की नीयत से हमला करती, तो एक से अधिक वार होने की संभावना होती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस समय गुलाब सिंह मौके पर पहुंचा, उस समय आशा अपने पिता की छाती से बह रहे खून को रोकने की कोशिश कर रही थी, न कि हमला कर रही थी। कोर्ट ने पुलिस को भी लगाई फटकार सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के दौरान तथ्यों को सही तरीके से परखना जरूरी होता है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इस मामले में थाना आईटी पार्क के तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जसपाल सिंह भी कोर्ट में कई बार गवाही देने पहुंचे, लेकिन पुलिस की ओर से पेश किए गए सबूत कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सके। जानिए पूरा मामला क्या था चंडीगढ़ के थाना आईटी पार्क पुलिस ने 10 अगस्त 2023 को किशनगढ़ गांव में हुई हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस के मुताबिक, किशनगढ़ निवासी सुमेई लाल की चाकू से हमला कर हत्या की गई थी। जांच के बाद पुलिस ने मृतक की बेटी आशा को आरोपी बनाते हुए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस रिकॉर्ड में बताया गया कि मृतक का पोस्टमॉर्टम सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल अस्पताल में कराया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ बताया गया था कि छाती में लगे गहरे जख्म से ज्यादा खून बहने के कारण मौत हुई। डॉक्टरों के अनुसार यह चोट तेज धार वाले हथियार से लगी थी। चार्जशीट के अनुसार, शिकायतकर्ता गुलाब सिंह ने पहले पुलिस को बताया था कि वह पानी लेने सुमेई लाल के घर गया था, जहां वह खून से लथपथ हालत में फर्श पर पड़े थे। हालांकि कोर्ट में गवाही के दौरान गुलाब अपने उसी बयान से पलट गया और कहा कि उसने किसी को हमला करते नहीं देखा।

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