चंडीगढ़ में 200 करोड़ टैक्स बकाया:निगम बनाएगा नई वसूली पॉलिसी; 3 महीने में होगी लागू; बड़ी बकाया राशि वालों पर होगी कुर्की

चंडीगढ़ नगर निगम की आर्थिक हालत लगातार खराब हो रही है, जिस वजह से अब निगम बड़े प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों से वसूली के लिए नई नीति बनाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने बताया कि अगले तीन महीनों में नई वसूली नीति तैयार कर ली जाएगी। इस बीच, टैक्स भुगतान पर छूट की स्कीम से पिछले दो महीनों में 62 करोड़ रुपए की वसूली हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले दोगुनी है। हाल ही में हुई बैठक में टॉप 20 बड़े बकायेदारों की सूची रखी गई, जिनमें कई सरकारी और निजी संस्थान शामिल हैं, जिन पर लगभग 200 करोड़ रुपए बकाया है। पूर्व मेयर सिद्धू ने कहा कि अगर यह राशि वसूल ली जाए, तो नगर निगम की वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है और शहर की कई समस्याओं का समाधान निकलेगा। संस्थानों से भी वसूली के प्रयास जारी कमिश्नर ने बताया कि पीजीआई (PGIMER) ने पहले ही 12 करोड़ रुपए टैक्स के रूप में जमा करा दिए हैं। बाकी संस्थानों से भी वसूली के प्रयास जारी हैं। हालांकि, कई संस्थानों ने कोर्ट में केस डाल रखे हैं और महंगे वकील किए हुए हैं, जिससे टैक्स वसूली की प्रक्रिया धीमी हो गई है। निगम ने भेजे नोटिस निगम ने 40 से ज्यादा बड़े डिफॉल्टरों को टैक्स चुकाने के लिए नोटिस जारी किए हैं, जिन पर कुल ₹5 करोड़ से अधिक की बकाया राशि है। नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद डिफॉल्टरों को कुछ समय दिया गया है। अगर इस अवधि में टैक्स जमा नहीं किया गया तो निगम उनके मकान या दुकान को कुर्क कर सकता है। नोटिस व्यवसायिक और आवासीय दोनों तरह की संपत्तियों के मालिकों को भेजे गए हैं। अगले चरण में निगम की ओर से पंजाब, हरियाणा और यूटी प्रशासन के विभिन्न सरकारी विभागों को भी टैक्स भुगतान न करने पर नोटिस भेजे जाएंगे। जानकारी के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी, पीजीआई, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज और कई अन्य सरकारी संस्थानों पर करोड़ों रुपए का टैक्स बकाया है। इनमें से कई मामलों में टैक्स भुगतान को लेकर कानूनी विवाद भी चल रहे हैं। CAG की रिपोर्ट में नगर निगम की खिंचाई हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में चंडीगढ़ नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में लापरवाही के लिए फटकार लगाई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि निगम के पास टैक्स वसूली के लिए कोई प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है।

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