केंद्र सरकार चंडीगढ़ UT का स्टेट्स बदलने के लिए लोक सभा में बिल ला रही है। इसके पास होते ही चंडीगढ़ भारतीय न्याय पीठ की धारा 239 से हटकर 240 में हो जाएगा। यानि कि चंडीगढ़ पूरी तरह यह UT होगा और इसकी कमान सीधे तौर पर राष्ट्रपति के हाथ में होगी। वह यहां के कानून, शिक्षा नीति के साथ साथ प्रशासनिक फेरबदल कर सकने में समक्ष होंगे। यह फैसला अकेले चंडीगढ़ के लिए नहीं लिया गया है बल्कि उन सभी राज्यों के लिए लिया गया है, जिनके पास अपनी विधानसभा नहीं है। मगर सबसे ज्यादा विवाद चंडीगढ़ को लेकर है। इसका मुख्य कारण इस पर पंजाब एवं हरियाणा राज्यों का हक है। यह विवाद पिछले लंबे समय से चलता आ रहा है। जो कभी सुलझ नहीं सका है। पंजाब की राजनीतिक पार्टियों का दावा है कि चंडीगढ़ को पंजाब के गांवों में बनाया गया था। इस लिए इसे चंडीगढ़ को दे दिया जाना चाहिए। मगर केंद्र इसे इस बिल के जरिए स्वतंत्र करने के बाद हरियाणा को देने का राह बना रहा है। 70 वर्ष लंबा विवाद, जिसे पांच कमिशन नहीं सुलझा पाए चंडीगढ़ पर हक का विवाद करीबन 70 वर्ष पुराना है। इसकी शुरुआत 1966 में विशाल पूर्वी पंजाब को तोड़कर बनाए गए हरियाणा राज्य के साथ ही शुरू हो गई थी। 1966 से लेकर 1986 तक चंडीगढ़ के हक को लेकर छह कमीशन बने, मगर हल कुछ भी नहीं निकल पाया है। 1986 से लेकर अब तक इस पर कोई पहल नहीं की गई है। अब केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे लेकर संशोधन बिल लाने के साथ ही यह मुद्दा एक बार फिर सुलग उठा है। चंडीगढ़ को लेकर दिलचस्प घटनाक्रम अक्टूबर 1952 में इस राजधानी की नींव पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी। 7 अक्टूबर 1953 को राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन कर इसकी शुरुआत की थी। 1956 से पहले पेप्सू ( पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन) राज्य की राजधानी पटियाला और पूर्वी राज्य की राजधानी चंडीगढ़ थी। 1 नवंबर 1956 को दोनों राज्यों को मिलाकर एक राज्य पंजाब बना दिया गया था। इसकी राजधानी चंडीगढ़ को बनाया गया था। 1956 से लेकर 1966 तक चंडीगढ़ विधानसभा था और इसका नंबर 10 था । 1966 में हरियाणा बनाया गया। यहां से चंडीगढ़ पर दोनों राज्यों के हक की जंग शुरू हो गई थी और चंडीगढ़ को पंजाब रिआर्गनाइजेशन एक्ट की सेक्शन 4 के तहत चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही चंडीगढ़ पर पंजाब के हक का विवाद शुरू हो गया। इसे सुलझाने के लिए छह कमीशन बने। जानिए कब किस कमीशन ने क्या किया केंद्र सरकार के मौजूदा फैसले पर विरोधी नेताओं के रीएक्शन सलाइड्स में पढ़ें…… इस फैसले के लागू होने से चंडीगढ़ में क्या बदलेगा… शिअद ने बुलाई कोर कमेटी की बैठक, संघर्ष की तैयारी केंद्र सरकार की तरफ से चंडीगढ़ UT का स्टेट्स बदलने के लिए लाए जा रहे बिल के खिलाफ अब शिरोमणि अकाली दल ने कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। इसकी जानकारी देते हुए दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि 24 नवंबर 2025 को पार्टी मुख्यालय में यह बैठक बुलाई गई है। इसमें अगले संघर्ष की रूप रेखा तैयार करने के साथ साथ कानून के माहिरों से भी विचार विमर्श किया जा रहा है। हम इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। क्या थे पेप्सू के क्षेत्र पेप्सू (PEPSU) का मतलब है पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन (Patiala and East Punjab States Union)। यह भारत का एक पूर्व राज्य था जो 1948 में आठ रियासतों को मिलाकर बनाया गया था। पेप्सू का गठन भारत की स्वतंत्रता के बाद रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा था। इसका उद्देश्य इन छोटी रियासतों को एक साथ लाकर एक अधिक व्यवहार्य प्रशासनिक इकाई बनाना था। ये रियासतें थीं: पटियाला, जींद, नाभा, कपूरथला, फरीदकोट, मलेरकोटला, कालका. नालागढ़। पेप्सू की राजधानी पटियाला थी। 1956 में, पेप्सू को पंजाब राज्य में मिला दिया गया। चंडीगढ़ को इसकी राजधानी बनाया


