चंडीगढ DGP को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश:ऑनलाइन फ्रॉड केस में लापरवाही, जताई नाराजगी, सरकारी वकील बोले- पुलिस ने नहीं दी जानकारी

ऑनलाइन जॉब फ्रॉड से जुड़े साइबर ठगी मामले की जमानत सुनवाई के दौरान पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चंडीगढ़ पुलिस- प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। हाईकोर्ट उस समय हैरान रह गई, जब सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में न तो कोई जानकारी दी है और न ही कोई रिपोर्ट सौंपी है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाती है और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालती है। हाईकोर्ट ने इस लापरवाही को “अस्पष्ट और अस्वीकार्य” बताते हुए चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी को खुद अदालत में पेश होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने यह आदेश ऑनलाइन जॉब फ्रॉड के आरोपी विजय कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। आरोपी ने पार्ट-टाइम जॉब और यूट्यूब वीडियो लाइक करने के नाम पर करीब 10,99,520 रुपए की ठगी की थी। यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए ठगी का पूरा मामला…. पार्ट टाइम जाब का लालच देकर वॉट्सऐप पर संपर्क किया
मामले में शिकायतकर्ता स्निग्धा रेड्डी ने पुलिस को बताया कि उनसे घर बैठे पार्ट-टाइम जॉब और यूट्यूब वीडियो लाइक करने के नाम पर ठगी की गई। पीड़िता के मुताबिक, दिसंबर 2024 में उन्हें वॉट्सऐप के जरिए संपर्क किया गया। शुरुआत में छोटे-छोटे टास्क देकर कुछ पैसे भी दिए गए, जिससे उनका भरोसा जीत लिया गया। ‘प्री-पेमेंट टास्क’ के नाम पर 10,99,520 रुपए की ठगी
इसके बाद ‘प्री-पेमेंट टास्क’ के नाम पर उनसे बार-बार पैसे मंगवाए गए। पीड़िता ने अपने एसबीआई और एचडीएफसी बैंक खातों से किश्तों में 10,99,520 लाख रुपए की रकम भेजी। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो कभी तकनीकी खराबी तो कभी अकाउंट ब्लॉक होने का बहाना बनाया गया। इसके बाद भी अतिरिक्त शुल्क का बहाना बनाकर उनसे और पैसे मांगे जाते रहे। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया
ठगी का पता चलने के बाद स्निग्धा रेड्डी ने चंडीगढ़ पुलिस को मामले की शिकायत दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर 30 मई, 2025 को आरोपी विजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी विजय कुमार तभी से न्यायिक हिरासत में जेल में है। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका दायर की। अब जानिए बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में क्या बोला… आरोपी का नाम सीधे तौर पर एफआईआर में दर्ज नहीं
आरोपी विजय कुमार की जमानत की अर्जी पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई की। बचाव पक्ष के वकील कुलविंदर भार्गव ने दलील दी कि विजय कुमार का नाम एफआईआर में सीधे तौर पर दर्ज नहीं था और उसे केवल सह-आरोपी के खुलासे के आधार पर गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी को मिली चुकी जमानत, विजय को भी दी जाए
बचाव पक्ष के वकील कुलविंदर भार्गव ने यह भी कहा कि मामले के मुख्य आरोपी सनी को 10 दिसंबर 2025 को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर विजय कुमार को भी जमानत मिलनी चाहिए। इसके अलावा तर्क दिया गया कि पुलिस जांच पूरी कर चालान पेश कर चुकी है और आरोपी से कोई और बरामदगी बाकी नहीं है।

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