ओडिशा मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (ओएमएसए) के आह्वान पर राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में जारी चिकित्सकों के आंदोलन का असर चंपुआ अनुमंडल अस्पताल में लगातार बना हुआ है। चिकित्सकों की दस सूत्री मांगें जिनमें सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों को भरना प्रमुख है। इसको लेकर बीते 26 दिसंबर से आंदोलन जारी है। आंदोलन के तहत चिकित्सकों ने प्रतिदिन एक घंटे के लिए अस्पताल की सेवाएं ठप रखने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में शुक्रवार को लगातार आठवें दिन भी चंपुआ अनुमंडल अस्पताल में सुबह 10 बजे से 11 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। चिकित्सकों ने शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखा। ओपीडी बंद रहने के कारण चंपुआ अनुमंडल क्षेत्र के अलावा पश्चिम सिंहभूम जिले के सीमावर्ती एवं दूर-दराज गांवों से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को लगातार भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज सुबह से ही अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के आने का इंतजार करते दिखे, ग्यारह बजे से पूर्व डॉक्टर और मरीज ओपीडी के बाहर खड़े दिखे। हालांकि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रखी गईं, लेकिन नियमित ओपीडी सेवाएं ठप रहने से आम मरीजों खासकर गंभीर रूप से बीमार मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। क्या है दस सूत्री मांगें : सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों की तत्काल बहाली, केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप वेतन समानता, डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) लागू करने, कैडर पुनर्गठन, विशेषज्ञ व सुपर-स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को विशेष प्रोत्साहन देने, दुर्गम व आदिवासी क्षेत्रों में सेवा के बाद स्थानांतरण नीति लागू करने, समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) का गठन, अस्पताल परिसरों में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को आवास व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा लंबे समय से कार्यरत संविदा चिकित्सकों की सेवा नियमित करने जैसी दस सूत्री मांगों को लेकर ओडिशा राज्य के चिकित्सक आन्दोलन कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


