भास्कर न्यूज | चतरा ग्राम्य कार्य विभाग कार्य प्रमंडल, चतरा की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पिछले वर्ष जून माह से प्रमंडल का खजाना खाली होने के कारण जिले में 315 करोड़ रुपये की 171 योजनाएं अधर में लटक गई हैं। भुगतान नहीं होने से जहां विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं संवेदकों की मुश्किलें भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों और मरम्मत से जुड़ी कुल 171 योजनाओं पर कार्य होना था। इन योजनाओं की कुल प्राक्कलन राशि 315 करोड़ रुपये है। इसमें 224 करोड़ 56 लाख रुपये की 132 योजनाएं सड़क मरम्मत से संबंधित हैं, जबकि 90 करोड़ 42 लाख रुपये की 39 योजनाएं नई सड़क निर्माण की हैं। वर्तमान में संवेदकों का लगभग 65 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। भुगतान नहीं होने के कारण कई संवेदक लगातार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इसका सीधा असर कार्यों की प्रगति पर पड़ रहा है। कई जगहों पर निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर काम पूरी तरह ठप हो चुका है। इससे ग्रामीण इलाकों में आवागमन बाधित हो रहा है और विकास की रफ्तार थम सी गई है। संवेदकों का कहना है कि भुगतान लंबित रहने से वे सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इससे वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। यदि जल्द ही राशि की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में ग्रामीण सड़कों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं गंभीर संकट में आ सकती हैं। राशि के अभाव में मयूरहंड प्रखंड मुख्यालय से पीडब्ल्यू रोड तेतरिया मोड़ से तीलहा तक की सड़क निर्माण योजना, जिसकी लागत करीब 18 करोड़ रुपये है, पूरी तरह बंद पड़ी है। इसी तरह चतरा–रांची पथ के जबड़ा से तुनदाग ग्राम भाया असेल तक की सड़क (3.45 करोड़ रुपये) तथा अंबाताड़–जमुआ आरईओ रोड भाया सनाही तक की सड़क (3.03 करोड़ रुपये) का निर्माण कार्य भी रुका हुआ है। ^ राज्य स्तर से राशि का आवंटन नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जैसे ही फंड उपलब्ध होगा, प्राथमिकता के आधार पर संवेदकों का भुगतान किया जाएगा। हालांकि, राशि मिलने की कोई स्पष्ट समय-सीमा फिलहाल तय नहीं की गई है।^ -देव सहाय , कार्यपालक अभियंता चतरा।


