चतरा जिले में जंगली हाथियों के हमले से दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। हाथियों के हमले में घायल हुए एक और युवक विकास भुइयां की हजारीबाग में इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। वन विभाग की कथित निष्क्रियता के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों ने चतरा-सिमरिया मुख्य मार्ग को कुंदरी के पास अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि मृतकों के परिजनों को तत्काल मुआवजा दिया जाए और हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए ठोस उपाय किए जाएं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे सड़क जाम नहीं हटाएंगे। हजारीबाग में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया कुंदरी क्षेत्र में हाथियों के लगातार हमलों से ग्रामीण भयभीत हैं। हाल ही में हुए इन हमलों में मनोज भुइयां की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। गंभीर रूप से घायल विकास भुइयां ने भी हजारीबाग में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इन दो मौतों और कई पालतू जानवरों के मारे जाने के बाद सोनपुर और रामपुर के ग्रामीण प्रशासन से नाराज हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग और पुलिस प्रशासन केवल आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे। बीती रात भी हाथियों ने सोनपुर गांव में घुसकर कई पालतू जानवरों को मार डाला और फसलों को नुकसान पहुंचाया। अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे: ग्रामीण स्थानीय ग्रामीण अनिल सिंह ने वन विभाग पर निष्क्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभाग की टीम आती है और पटाखे लाने की बात कहकर चली जाती है, लेकिन फिर वापस नहीं लौटती। पुलिस भी आने का आश्वासन देती है, पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मृतकों के परिजनों को चेक के माध्यम से मुआवजा और मारे गए मवेशियों का हर्जाना नहीं मिलता, तब तक सड़क जाम जारी रहेगा। सड़क जाम के कारण चतरा-सिमरिया मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे यातायात बाधित हुआ है। यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी रातों की नींद हराम हो चुकी है और अब वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग की टीम मौके पर आकर लिखित रूप से सुरक्षा की गारंटी दे। फिलहाल, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच गतिरोध बना हुआ है। देखना होगा कि वन विभाग की नींद कब खुलती है और क्या ग्रामीणों को उनका हक मिल पाता है या नहीं।


