शहर में 150 साल से ज्यादा पुराने दो चर्च हैं। पहला जीईएल चर्च मेन रोड व दूसरा संत पॉल कैथेड्रल चर्च बहू बाजार। इन चर्चों में निर्माण काल से ही कई पुरानी वस्तुओं आज तक संग्रहित कर रखी हुई हैं। जीईएल चर्च में कपड़े का बना पंखा, कैंडल हैंगिंग, फर्नीचर, घंटी, बेदी के सामने खुला बाइबल, हिंदी काउंटिंग टेबल, पुल्पिट, बपतिस्मा कुंड व अन्य चीजें। वहीं, संत पॉल में निर्माण काल के बने फर्नीचर आज भी चर्च की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस पर आज भी बिशप बैठते हैं। इसके साथ ही चर्च में उकाब, पुल्पिट, बेदी, दो घंटी व अन्य वस्तुएं भी हैं। इसके साथ ही दोनों चर्च में अंग्रेजों द्वारा स्थापित किए पाइप ऑर्गन भी हैं, जिन्हें आज भी मिस्सा के दौरान बजाया जाता है। सबसे बड़ा पाइप ऑर्गन है यहां, पुराना पाइप ऑर्गन प्रथम विश्व युद्ध में नष्ट हो गया था जीईएल चर्च में लगे पाइप ऑर्गन के वादक मनीष रोहित एक्का ने बताया कि वह 2012 से इसे बजा रहे हैं। यह छोटानागपुर क्षेत्र का सबसे बड़ा पाइप ऑर्गन है, जिसे वर्ष 2014 में स्थापित किया गया था। पहला पाइप ऑर्गन वर्ष 1856 में स्थापित किया गया था जो 1857 के सिपाही विद्रोह में नष्ट हो गया था, जब चर्च के टावर पर तोप के गोले दागे गए। दूसरा पाइप ऑर्गन वर्ष 1908 में स्थापित किया गया था। प्रथम विश्व युद्ध के समय जब जर्मन मिशनरियों को यहां से जाना पड़ा, तब रखरखाव के अभाव में पाइप ऑर्गन खराब हो गया। तीसरा पाइप ऑर्गन 2007 में स्थापित किया गया था और यह 2012 तक उपयोग में था। चौथा पाइप ऑर्गन वर्ष 2014 में स्थापित किया गया। मनीष ने बताया कि पाइप ऑर्गन में 1800 पाइप्स हैं। इसे हर रविवार बजाया जाता है। 2018 से आइजेक कंडुलना और 2023 से निखिल सोय भी इसे बजा रहे हैं। इंग्लैंड से पानी जहाज से कोलकाता, फिर बैल गाड़ी से रांची लाया गया पाइप ऑर्गन संत पॉल कैथेड्रल पाइप ऑर्गन को 1895 में स्थापित किया गया था। 129 साल पुराने इस म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट को इंग्लैंड से लाया गया था। पहले यह पानी जहाज द्वारा कोलकाता तक आया और फिर कोलकाता से बैलगाड़ी में रखकर रांची लाया गया। वर्तमान में बहु बाजार के नयाटोली के निवासी राजदीप इसे बजाते हैं। उन्होंने कहा कि वो 2005 से पाइप ऑर्गन बजाते आ रहे हैं। उस समय बिजली नहीं थी, तो लोग इसके बेलों में पंप करते थे। अब बिजली है तो 2 मोटर लगाए गए हैं, जिसके जरिए इसके बेलों में हवा भरी जाती है। इस पाइप ऑर्गन में हाथों से बजाने के लिए दो की-बोर्ड हैं, प्रत्येक की बोर्ड में 56 की हैं। पूर्व में इसमें सिर्फ एक ही की-बोर्ड था, बाद में इसमें एक और की बोर्ड लगाया गया। इसके साथ पैरों से बजाने के लिए एक पेडल-बोर्ड है, जिसमें 27 की हैं। ऑर्गन में कुल 643 पाइप हैं, जिनसे अलग-अलग धुन निकलती हैं। राजदीप ने बताया कि वे बच्चों को इसे बजाना सीखा रहे हैं। दोनों गिरजाघर में है निर्माण काल की घंटी जीईएल गिरजाघर जब बना था, उस समय घंटी नहीं था। कुछ साल बाद 1860 में जर्मनी से लाई गई 2 घंटी यहां लगाई गई। 1 बड़ी घंटी और एक छोटी घंटी। छोटा घंटी कुछ साल पहले दरार आने के कारण ख़राब हो गई, इसलिए उसको कांच के बॉक्स में दर्शन के लिए सजा कर रखी गई है। बड़ी घंटी आज भी बजती है। वहीं, संत पॉल्स कैथेड्रल में लगी दो घंटी बुर्ज की दूसरी अटारी में लगी हैं। दोनों घंटी 1874 ई. में टांगी गई थीं। आज भी इनकी आवाज कई मील तक सुनाई पड़ती हैं। संत पॉल कैथेड्रल में इंग्लैंड से आया था और जीईएल चर्च में 4 बार बदला गया है पाइप ऑर्गन


