चांदी में एक दिन में करीब 15.9% और सोने में 7.6% की गिरावट

शुक्रवार को सर्राफा बाजार में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने व्यापारियों से लेकर निवेशकों तक को चौंका दिया। चांदी की कीमतें दिन की शुरुआत में मजबूती दिखाती नजर आईं, लेकिन कुछ ही घंटों में ऐसा दबाव बना कि भाव धड़ाम से नीचे आ गिरे। दिन के ऊपरी स्तर 3,89,996 रुपए प्रति किलो से गिरकर चांदी 3,27,913 तक आ गई। यानी एक ही दिन में लगभग 15.9% की बड़ी गिरावट। शाम करीब आठ बजे हाजिर बाजार में चांदी के भाव 3,37,105 प्रति किलो पर टिके दिखे, जबकि आरटीजीएस में यह 3,38,420 पर बिकी। लेकिन सबसे बड़ी हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी खरीददार बाजार से गायब रहे। बीकानेर सर्राफा बाजार में दिनभर चांदी बेचने वाले ग्राहक अधिक दिखे, जबकि खरीदारी लगभग ठप रही। सोने में भी दबाव देखने को मिला। गुरुवार रात को सोना 1,84,000 प्रति दस ग्राम तक था, लेकिन शुक्रवार को बाजार खुलते ही इसके भाव करीब 1,70,000 तक आ गए। यानी करीब 7.6% की गिरावट।बीकानेर के एक स्थानीय निवेशक ने कहा, मैंने चांदी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ऊंचे स्तर पर खरीदी थी। अब इतने कम भाव देखकर बेचूं तो नुकसान है, रखूं तो डर है कि और नीचे न चली जाए। यह चिंता फिलहाल कई छोटे निवेशकों में दिखाई दे रही है। घबराहट में लिया फैसला नुकसान बढ़ाता है : चांदी में पिछले महीनों में लगातार तेजी रही। जब भाव बहुत ऊपर चले जाते हैं तो बड़े निवेशक मुनाफा वसूलते हैं। घबराकर बेचने वाले छोटे निवेशक अक्सर नीचे के स्तर पर फंस जाते हैं। धैर्य जरूरी है। औद्योगिक मांग के कारण चांदी की दीर्घकालीन संभावनाएं अभी भी मजबूत हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदी गई चांदी को लेकर जल्दबाजी में निर्णय न लें। अगर निवेश लंबी अवधि का है, तो गिरावट को सहन किया जा सकता है। जिन लोगों ने उधार या शॉर्ट टर्म लक्ष्य से खरीदा है, उन्हें जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। डर ने बाजार की रफ्तार रोक दी चांदी में आई तेज गिरावट ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है। सामान्य तौर पर गिरावट को खरीद का अवसर माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर उलटी रही। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि लोग पहले से ऊंचे दामों पर खरीदी गई चांदी को नुकसान से बचाने के लिए बेच रहे हैं। स्थिति यह है कि हाजिर बाजार से 10,000 प्रति किलो कम भाव पर भी खरीदार नहीं मिल रहे। इसका सीधा संकेत है कि बाजार में विश्वास की कमी है और लोग आगे और गिरावट की आशंका से दूर रहना चाह रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और सट्टा कारोबारियों की भारी बिकवाली ने यह स्थिति बनाई है। आगे का भविष्य : चांदी का उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ रहा है, जिससे लंबी अवधि में मांग बनी रहने की संभावना है। हालांकि, फिलहाल बाजार भावनाओं से संचालित हो रहा है। स्पष्ट है कि शुक्रवार की गिरावट ने बाजार का मूड बदल दिया है, तेजी के दौर से निकलकर अब सतर्कता और डर का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे समय में समझदारी, धैर्य और सही सलाह ही निवेशकों को सुरक्षित रख सकती है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *