चाइना डोर से हुई दो मौतों से शहर सदमे में हैं जहां समराला में चाइना डोर ने एक मां की पूरी दुनिया छीन ली। वहीं मुल्लांपुर दाखा में दो साल का युवराज अपनी करुण आवाज में अपनी मां को ढूंढ रहा है। जहां मां कमलजीत कौर अपने बेटे तरण को याद करते करते बार बार बेहोश हो रही है तो वहीं युवराज सोते-सोते उठ बैठता है और अपनी मां को पुकारने लगता है। दोनों जगह अंतिम संस्कार कर दिया गया है, लेकिन चाइना डोर की लगाई आग बुझने का नाम नहीं ले रही। प्रशासन की उदासीनता के बीच अकालगढ़ और सुधार की पंचायतों ने चाइना डोर समेत इलाके में पतंगबाजी को बैन करने और जिम्मेदारों के बायकॉट का साहसिक फैसला भी लिया है। जान गंवाने वाली महिला सरबजीत कौर के ससुराल गांव अकालगढ़ की महिला सरपंच स्वर्णजीत कौर और उसके पति सुखमिंदर सिंह तथा सुधार गांव की महिला सरपंच बीबी हरजिंदर कौर और उसके पति इंद्रजीत सिंह ने बताया, पंचायतों की विशेष बैठक बुलाकर चाइना डोर पर लिखित रूप में पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। गांव में न तो चाइना डोर बेची जाएगी और न ही किसी को इसका इस्तेमाल करने दिया जाएगा। फैसले की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चाइना डोर बेचने वाले का सामाजिक बायकॉट भी पंचायत द्वारा किया जाएगा। दो गांवों के फैसले के बाद आस पास के गावों की पंचायतों ने भी चाइना डोर के खिलाफ बैठकें बुलाने का काम शुरू कर दिया है। कमरों में ढूंढ रहा युवराज- मां को बुलाओ मुल्लांपुर दाखा दो साल के मासूम युवराज की करुणा भरी पुकार से परिवार तीन दिनों से दहला हुआ है। वह मां को रोज अनगिनत बार बुलाता है। कई बार तो सोते-सोते वह अचानक जाग जाता है। तब भी उसकी एक ही एक ही मांग होती है कि मां को बुलाओ। मां आ जाओ। युवराज के आंसू और दिल को छू लेने वाली आवाज पिता, दादा, दादी, चाचा समेत सारे रिश्तेदारों को अंदर तक हिला देती है। अफसोस है कि मां सरबजीत कौर कभी वापस नहीं लौटेगी। पतंग की खतरनाक डोर ने 25 जनवरी को उसकी जान ले ली थी। मां को तरसता युवराज घर के अलग-अलग कमरों में उसे ढूंढ रहा है। वह गोद में तब भी रोता है, जब दादी उसे दूध पिलाती हैं। उसे मां चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुछ पैसों की खातिर लालची कारोबारियों ने दो साल के बच्चे को उसकी मां से हमेशा के लिए अलग कर दिया। पिता के साथ ही परिवार ने लोगों से अपील की है कि चाइना डोर को बंद किया जाए। कारोबारियों को जेल भेजा जाए। इस खतरनाक डोर का हर तरफ से बहिष्कार हो। पुलिस दिखावे नहीं इसे रोकने के लिए सख्ती से कार्रवाई करे। तरण…-तरण पुकार कर मां हो रही बेहोश समराला के नजदीक गांव रोहला की सरपंच कमलजीत कौर उस दर्द से गुजर रही हैं, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जिस बेटे को उन्होंने 15 साल तक अपनी गोद में खिलाया, पढ़ाया, बड़ा किया… आज उसी बेटे की आवाज़ ढूंढते-ढूंढते वह बार-बार बेहोश हो जाती हैं। कमरे के अंदर वह चीख-चीख कर पुकारती हैं।“तरण ओए तरण… मेरा पुत्तर तरण…”और फिर दर्द की इंतहा पर पहुंचकर मां बेहोश हो जाती हैं। डॉक्टरों को उन्हें बार-बार नींद का इंजेक्शन लगाना पड़ रहा है, क्योंकि होश में आते ही वह सिर्फ अपने बेटे को ढूंढती हैं। सरपंच कमलजीत कौर के बेटे तरणजोत सिंह की मौत चाइना डोर की वजह से हो गई। उनके पति हरचंद सिंह की आंखें आज भी उस मंजर को याद कर भर आती हैं। शनिवार को तरण आखिरी बार स्कूल गया था। जाते समय उसने कुछ भी नहीं खाया और बस इतना कहा, पापा, जल्दी लेने आ जाना।”किसे पता था कि यह आखिरी बात होगी। काम की मजबूरी में हरचंद सिंह अपने भतीजे को भेज देते हैं। रास्ते में चाइना डोर तरण के गले को चीरती हुई निकल गई। खून से लथपथ तरण दर्द में भी बोलता रहा, वीरे, जल्दी मुझे हॉस्पिटल ले चलो लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया।


