चोइथराम चेरिटेबल ट्रस्ट (CCT) से जुड़ी 21 हजार करोड़ की संपत्तियों की जांच अब जल्द शुरू हो होगी। दरअसल, रजिस्ट्रार की जांच के खिलाफ लगी याचिका खारिज के बाद अब जांच का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, इस जांच में काफी समय लग सकता है क्योंकि CCT, चोइथराम इंटरनेशनल फाउंडेशन (CIF) से संबद्ध है। हालांकि जांच में दस्तावेजी पेचीदगियां रहेंगी लेकिन पूरी होने के बाद संपत्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मामले हाईकोर्ट ने पूर्व ट्रस्टियों की सभी आपत्तियों को खारिज कर कहा है कि कहीं भी कार्यरत ट्रस्टी को आवेदन देने से नहीं रोका है। किसी भी व्यक्ति द्वारा आवेदन किया जा सकता है। आवेदन में लगाए आरोप प्रथम दृष्टया कार्रवाई और सुनवाई योग्य कारण प्रस्तुत करते हैं। चोइथराम इंटरनेशनल फाउंडेशन (CIF) की ट्रस्ट डीड की व्याख्या का मुद्दा विचारणीय नहीं है। इसे अंतिम सुनवाई में देखा जा सकता है। कोर्ट ने पगरानी का नाम शिकायत से हटाने की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि CCT का ट्रस्टी होने के कारण उन्हें पार्टी से हटाने का आधार नहीं है। अब जांच में सच्चाई और तथ्य खास रहेंगे जिन पर आगे की कार्यवाही पर विचार होगा। पहले जानिए क्या है मामला 1972 से इंदौर में स्कूल, कॉलेज और अस्पताल का संचालन
दरअसल, चोइथराम चेरिटेबल ट्रस्ट 1972 से इंदौर में स्कूल, कॉलेज और अस्पताल संचालित कर रहा है। साथ ही सालों से अपनी वैधानिक फंडिंग को लेकर संघर्ष कर रहा था। ट्रस्ट के संस्थापक ठाकुरदास चोइथराम पगारानी ने विदेश में चोइथराम इंटरनेशनल फाउंडेशन (CIF) की स्थापना ट्रस्टों को वित्तीय सहायता देने के लिए की थी। शिकायत के अनुसार CIF के फंड और निवेश अरबों रुपए के हैं। इनमें CCT का लगभग एक-चौथाई (₹21,000 करोड़ अनुमानित) हिस्सा बताया है। CCT के चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी सतीश मोतीयानी ने आरोप लगाया कि यह राशि कभी CCT तक नहीं पहुंचाई गई। 4 व्यक्तियों लेखराज पगारानी, किशोर पगारानी, रमेश थानवानी और दयाल दतवानी ने अपने CCT के ट्रस्टी/पूर्व ट्रस्टी के पद पर रहते हुए CIF से संबंधित सूचनाएं और और महत्वपूर्ण ट्रेडमार्क विदेशी कंपनियों में दर्ज कराए हैं। इन चारों ने इंदौर के रजिस्ट्रार, लोक न्यास द्वारा की जा रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका दावा था कि यह मामला विदेशी संपत्तियों से जुड़ा होने के कारण रजिस्ट्रार की सीमा से बाहर है और कार्यवाही अमान्य है। इस मामले में हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर के विस्तृत आदेश में इन सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया था। अब आगे का रास्ता है साफ… ट्रस्टी का शिकायत करना विधि सम्मत
मोतियानी के एडवोकेट अमोल श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद स्पष्ट है कि कार्यवाही एमपी पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1951 की धारा 26 के तहत पूरी तरह वैध और बनाए रखने योग्य है। एक कार्यकारी ट्रस्टी द्वारा शिकायत दायर करना विधि सम्मत है। आरोप गंभीर हैं और रजिस्ट्रार को अपनी वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए। विदेशी संपत्ति का तर्क प्रारंभिक जांच को नहीं रोकता। इस आदेश के बाद अब मामला धारा 26 और 27 के तहत रजिस्ट्रार द्वारा आगे बढ़ेगा और आवश्यक होने पर विस्तृत सुनवाई के लिए जिला कोर्ट भेजा जा सकता है। ट्रस्ट संपत्तियों की पारदर्शिता और संरक्षण की दिशा में यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट शिकायत के आधार पर मामले और CIF की संपत्तियों की जांच कर पाएंगे। मामले में जिला कोर्ट को कार्रवाई के लिए भी भेज सकेंगे। रजिस्ट्रार ने खारिज किया था आवेदन
मोतीयानी की याचिका के पहले इसके खिलाफ पूर्व ट्रस्टियों ने रजिस्ट्रार को शिकायत खारिज करने का आवेदन दिया था। रजिस्ट्रार द्वारा आवेदन खारिज करने पर हाईकोर्ट में केस दायर किया था। इसमें कहा था कि मोतियानी ट्रस्टी हैं और वे आवेदन नहीं दे सकते। CIF का ट्रस्ट जर्सी (अमेरिका) में रजिस्टर्ड है, इसलिए उसका परीक्षण सिर्फ वहीं की अदालत कर सकती है। रजिस्ट्रार को सुनवाई का अधिकार नहीं है।


