भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के बाल रोग विभाग के एनआईसीयू में अत्यंत कम वजन वाले दो प्रीमेच्योर (समय से पहले जन्मे) शिशुओं के सफल उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई। दोनों शिशुओं को लंबे समय तक विशेष निगरानी और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई। पीएमसीएच के पीआईसीयू व एनआईसीयू इंचार्ज डॉ. पुनीत जैन ने बताया कि यह सफलता टीमवर्क, सतत निगरानी और मानवीय देखभाल का परिणाम है। उपलब्धि क्यों…प्री मैच्योर शिशु के अंग नहीं होते पूर्ण विकसित, संक्रमण का रहता है खतरा पहला मामला, 40 वर्षीय महिला से जुड़ा है, जिनका प्रसूति इतिहास काफी जटिल रहा है। महिला ने 10 अक्टूबर 2025 को 30 सप्ताह (लगभग 7 माह) की गर्भावस्था में शिशु को जन्म दिया। जन्म के समय शिशु बेहद कमजोर था और उसका वजन महज 660 ग्राम था।
अत्यंत कम वजन और अपूर्ण विकास के कारण शिशु को तत्काल एनआईसीयू में भर्ती किया गया। डॉ. जैन व उनकी टीम की देखरेख में शिशु 104 दिनों तक एनआईसीयू में उपचाराधीन रहा। निरंतर उपचार और संक्रमण नियंत्रण के बाद शिशु पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। डिस्चार्ज के समय उसका वजन 1.790 किलोग्राम दर्ज किया गया। दूसरा मामला, 2 दिसंबर 2025 को जन्मे शिशु का है, जिसकी गर्भावस्था अवधि केवल 27 सप्ताह थी। जन्म के समय उसका वजन 1.18 किग्रा था। कम गर्भावधि के कारण शिशु के फेफड़े और अन्य अंग नाजुक थे। शिशु को 51 दिन एनआईसीयू में विशेष देखभाल में रखा गया। उपचार के बाद शिशु स्थिर पाया गया। डिस्चार्ज के समय वजन 1.840 किग्रा रहा। राहुल अग्रवाल ने कहा- आधुनिक चिकित्सा असंभव को भी बना रही है संभव
पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल में उपलब्ध उन्नत एनआईसीयू सुविधाओं से समय-पूर्व जन्मे शिशुओं के उपचार में बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के समन्वय से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। डॉ. पुनीत जैन ने बताया कि उपचार में डॉ. सन्नी मालवीय, डॉ. धारा पटेल, डॉ. सविता सहित सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम शामिल रही। नर्सिंग स्टाफ ने 24 घंटे निगरानी की।


