चिकित्सा निदेशालय में 1.64 करोड़ के प्रस्ताव पेंडिंग:जिला अस्पताल में 10 बेड की डायलिसिस यूनिट और रामाश्रय अब तक नहीं बना, डीएमई में अटके प्रस्ताव

विधानसभा की बजट घोषणा के एक साल बाद भी जिला अस्पताल में दस बेड की डायलिसिस यूनिट और दस बेड के रामाश्रय के लिए भवन का निर्माण ही अब तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब 1.64 करोड़ की लागत के दोनों प्रोजेक्ट की फाइल चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में अटकी पड़ी है। राज्य सरकार ने पिछले बजट में जिला अस्पतालों में दस बेड के रामाश्रय और दस बेड की डायलिसिस यूनिट की घोषणा की थी, लेकिन इसकी वित्तीय स्वीकृति अभी तक जारी नहीं हुई है, जबकि 2026 का बजट पेश होने वाला है। दरअसल जिरिएट्रिक अस्पताल को रामाश्रय नाम दिया गया है। इसके तहत 50 लाख की कीमत से दस बेड का डेडिकेटेड वार्ड बनाया जाना है। जिला अस्पताल में इसके लिए पर्याप्त जगह भी है, लेकिन इस काम की वित्तीय स्वीकृति अभी तक जारी नहीं हो पाई है। पिछले चार महीने से फाइल चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में अटकी हुई है। यही स्थिति डायलिसिस यूनिट की है। हालांकि मरीजों की डायलिसिस का काम जिला अस्पताल में शुरू हो चुका है। राही केयर एनजीओ ने डायलिसिस प्रोसेसिंग यूनिट फिर से काम शुरू कर दिया है। इस संस्था से 2017 में दस साल के लिए एमओयू हुआ था। तीन साल से बंद थी डायलिसिस
जिला अस्पताल में डायलिसिस पिछले तीन साल से बंद पड़ी थी। डायलाइजर प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से एक ही डायलाइजर का मल्टीपल यूज किया जाता था, जिससे मरीजों के इंफेक्शन का खतरा रहता था। अब संस्था ने डायलाइजर प्रोसेसिंग यूनिट लगा ली है। इससे डायलाइजर को दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया जाता है। हालांकि पीबीएम हॉस्पिटल में सिंगल यूज डायलाइजर का उपयोग होता है। एक बार उपयोग में लेने के बाद उसे फेंक दिया जाता है। “रामाश्रय और डायलिसिस यूनिट के लिए बजट नहीं मिला है। इसके प्रस्ताव डीएमई को भेजे जा चुके हैं।”
-डॉ. सुनील हर्ष, अधीक्षक, जिला अस्पताल

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *