चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार गणतंत्र दिवस को मिलने वाले पुरस्कार के लिए मापदंड तय किए हैं। हर तरह से खरा उतरने वाले डॉक्टर, पैरामेडिकल और स्टाफ को ही पुरस्कार मिल सकेगा। किसी भी अधिकारी, स्टाफ के खिलाफ जांच, शिकायत, मामला दर्ज और न्यायिक मामला चल रहा है, तो उन्हें पुरस्कार नहीं मिलेगा। पिछले तीन साल के कार्य मूल्यांकन के साथ साल भर में उनका अधिकारियों और आमजन के साथ अच्छा व्यवहार देखा जाएगा। पूर्व में मिल चुके पुरस्कार या प्रशस्ति पत्र का भी अधिकारियों को उल्लेख करना अनिवार्य है। पुरस्कार के लिए कमेटी गठित
विभाग ने राज्य एवं जिला स्तर पर कमेटी का गठन किया गया है, जो जांच करके प्रशस्ति पत्र के लिए नाम का चयन करेगी। चिकित्सा विभाग के निदेशक की ओर से समस्त मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अस्पतालों के अधीक्षकों, अतिरिक्त निदेशकों, निदेशक (आरसीएच, एडस, सीफू), संयुक्त निदेशकों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) अधिकतम दो कर्मचारियों के नाम निर्धारित प्रपत्र में 21 जनवरी तक भेजना पड़ेगा। संबंधित अधिकारी की अनुशंसा करने पर ही पुरस्कार की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। प्रदेश में स्वास्थ्य भवन के अधीन करीब एक लाख कर्मचारी काम कर रहे है, जिसमें डॉक्टर, नर्सिंग, फार्मासिस्ट, मंत्रालयिक संवर्ग, लेखाकर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर और सूचना सहायक शामिल है। पुरस्कार के लिए संबंधित अधिकारी गाइडलाइन के अनुसार अनुशंसा करेंगे, जिससे पुरस्कार मिल सके। अनुशंसा के लिए भी गाइड लाइन की पालना जरूरी
“गणतंत्र दिवस पर मिलने वाले पुरस्कार के लिए पहली बार मापदंड बनाए गए हैं। इससे पारदर्शिता रहेगी और काम करने वाले कर्मचारी व अधिकारी को पुरस्कार मिल सकेगा। डॉक्टर, पैरामेडिकल और स्टाफ को संबंधित अधिकारी की ओर से अनुशंसा करने वाले अधिकारियों को गाइडलाइन की पालना करनी होगी। गाइडलाइन के अनुसार ही अनुशंसा की जा सकेगी और पुरस्कार मिल सकेगा।”
-डॉ. रवि प्रकाश माथुर, निदेशक (जन स्वास्थ्य) निरोगी राजस्थान दवा योजना; जयपुर 10वें नंबर पर
चिकित्सा विभाग की ओर से मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान दवा योजना (एमएनएनआरडीवाई) की दिसंबर-2024 की जारी रैकिंग में बीकानेर पहले, हनुमानगढ़ दूसरे और तीसरे नंबर पर श्रीगंगानगर है, जबकि जयपुर दसवें नंबर पर है। नवंबर माह में भी जयपुर 10 वें नंबर पर था। विभाग की ओर से दवा की उपलब्धता, पर्ची आदि के आधार पर रैकिंग जारी की जाती है, जबकि जैसलमेर जिला लगातार 34वें स्थान पर आने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। ये है मापदंड


