चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग उदयपुर के रिटायर्ड हुए जॉइंट डायरेक्टर (JD) डॉ जुल्फिकार अहमद काजी को एक साल पहले 1.25 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए ट्रेप करने के मामले में एसीबी ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इंटेलीजेंस यूनिट उदयपुर की पुलिस निरीक्षक डा. सोनू शेखावत ने बताया कि आरोपी उदयपुर के आयड़ स्थित लौहार कॉलोनी निवासी डॉ. जुल्फिकार अहमद काजी पुत्र निसार अहमद के विरुद्ध अनुसंधान पूर्ण कर लिया और आरोपी के विरूद्ध भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित हुए। इसके बाद कार्मिक विभाग जयपुर के संयुक्त शासन सचिव से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई। अनुसंधान से धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (यथा संशोधित 2018) में आरोप प्रमाणित पाए जाने से आरोपी के विरुद्ध ब्यूरो मुख्यालय द्वारा चार्जशीट के आदेश मिले। इसकी पालना में आरोपी डॉ. जुल्फिकार अहमद के विरुद्ध चालान उदयपुर के भ्रष्टाचार निवारण के विशिष्ट न्यायाधीश के समक्ष पेश एसीबी उपमहानिरीक्षक प्रहलाद सिंह कृष्णिया के निर्देशन में पुलिस निरीक्षक ने पेश किया। 1.25 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए ट्रेप किया था डा. सोनू ने बताया- 11 अगस्त को एसीबी ने डॉ जुल्फिकार को 1.25 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए ट्रेप किया था। इसमें एसीबी राजसमंद को परिवादी ने शिकायत दी थी। इसमें सोनोग्राफी मशीन को सील करने, सोनोग्राफी रजिस्टर वापस लौटाने और आगे परेशान नहीं करने की एवज में आरोपी डॉ. काजी रिश्वत की मांग कर रहे थे। सोनोग्राफी मशीन को सील करने की एवज में रिश्वत मांगी थी सीआई ने बताया- काजी द्वारा 26 जुलाई 2024 को रेवाबा इन्फर्टिलिटी हॉस्पीटल उदयपुर में किए निरीक्षण के दौरान सोनोग्राफी रजिस्टर को अपने कब्जे में लिया था। वे उसे वापस लौटाने एवं सोनाग्राफी मशीन को रेवाबा इन्फर्टीलिटी हॉस्पीटल उदयपुर से मनोहर मेटरनिटी होम राजसमन्द में स्थानान्तरित करने के क्रम में सोनोग्राफी मशीन को सील करने और आगे परेशान नहीं करने की एवज में रिश्वत मांग रहे थे। सोनू ने बताया कि 10 अगस्त 2024 को रिश्वत राशि मांग सत्यापन वार्ता में आरोपी डॉ जुल्फिकार अहमद काजी द्वारा परिवादी जयप्रकाश अग्रवाल से रिश्वत राशि 1,50,000 रुपए की मांग की। परिवादी ने रिश्वत राशि कुछ कम करने की कहने पर आरोपी डॉ जुल्फिकार द्वारा रिश्वत राशि 1,25,000 रुपए कर दी। 11 अगस्त 2024 को आरोपी द्वारा परिवादी से यह राशि अपने उदयपुर कार्यालय कक्ष में लेते हुए एसीबी ने पकड़ा लिया था। उल्लेखनीय है कि डा. काजी सेवानिवृत भी हो गए है।
चिकित्सा विभाग का जॉइंट डायरेक्टर रिश्वत लेते पकड़ा गया:सोनोग्राफी सेंटर संचालक को परेशान नहीं करने के एवज में मांगे थे 1.25 लाख


