खनिज संसाधनों से भरपूर चित्तौड़गढ़ जिले में खनिज विभाग ने वित्तीय साल 2024-25 के दौरान कठिन परिस्थितियों और सीमेंट उत्पादन में आई गिरावट के बावजूद अच्छा राजस्व अर्जित किया है। विभाग ने इस साल कुल 148 करोड़ रुपए की राजस्व आय अर्जित की, जबकि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 151 करोड़ रुपए का था। यानी लक्ष्य से सिर्फ 3 करोड़ रुपए कम वसूली होने के बावजूद, यह प्रदर्शन सराहनीय माना जा रहा है। सीमेंट उद्योग की सुस्ती बनी चुनौती
चित्तौड़गढ़ जिले में सीमेंट उद्योग एक प्रमुख खनिज आधारित उद्योग है। जिले में कई बड़ी सीमेंट कंपनियां कार्यरत हैं, जो यहां के ग्रेड-ए लाइमस्टोन का दोहन कर सीमेंट का उत्पादन करती हैं। हालांकि, इस साल सीमेंट बाजार में आई मंदी के चलते उत्पादन में गिरावट देखी गई है। साल 2023-24 में जहां कुल 13.23 मिलियन टन (एमटी) सीमेंट का उत्पादन हुआ था, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर 12.77 एमटी रह गया। इस कमी का सीधा असर खनिज विभाग की राजस्व आय पर पड़ा, क्योंकि विभाग को सीमेंट उत्पादन से ही सबसे अधिक रॉयल्टी प्राप्त होती है। ऐसे में लक्ष्य के निकट पहुंचना विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। नीलामी से मिली आर्थिक मदद
वित्तीय साल के दौरान विभाग ने कुछ अहम खनिज क्षेत्रों की नीलामी कर एक्स्ट्रा राजस्व अर्जित करने में सफलता हासिल की है। जिले के चंदाखेड़ी और पालका क्षेत्र में स्थित सीमेंट ग्रेड लाइमस्टोन ब्लॉक्स का ऑक्शन किया गया। इससे विभाग को 12.65 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई। इसके अलावा बजरी के 2 खनन पट्टों की भी नीलामी की गई, जिससे विभाग को एक्स्ट्रा 2 करोड़ रुपए की राजस्व आय हुई। ये पहले विभाग द्वारा राजस्व वसूली में हो रही कमी को संतुलित करने के लिए की गई थीं, जो काफी हद तक सफल रहीं। अवैध खनन पर सख्त रुख
विभाग ने केवल वैध खनन से ही नहीं, बल्कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई करते हुए भी राजस्व में इजाफा किया है। साल 2023-24 में अवैध खनन के कुल 237 मामले दर्ज किए गए थे, जिनसे विभाग को 2 करोड़ 36 लाख रुपए की राजस्व प्राप्ति हुई थी। हालांकि 2024-25 में विभाग ने केवल 99 मामलों को ही दर्ज किया, लेकिन इन मामलों से विभाग और सरकार को 4 करोड़ 31 लाख रुपए की राजस्व प्राप्ति हुई है। इससे स्पष्ट है कि इस बार कम संख्या में अधिक प्रभावी कार्रवाई की गई, जिसमें बड़ी मात्रा में चालान, शास्तियां और जब्ती हुई है। विशेष अभियान बना अवैध खनन रोकथाम का आधार
राज्य सरकार की ओर से हाल ही में 2 अप्रैल से अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है, जो जिले में प्रभावी सिद्ध हो रहा है। अभियान के तहत अब तक कुल 31 कार्रवाइयां की जा चुकी हैं। इनमें से 5 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि अन्य मामलों में शास्ति के माध्यम से कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों में कुल मिलाकर 40 लाख रुपए की शास्ति लगाई गई है। विशेष रूप से भूपालसागर और कपासन क्षेत्र में अवैध खनन के विरुद्ध सबसे ज्यादा कार्रवाइयां की गईं, जहां खनिज संसाधनों का दोहन लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ था। विभागीय नेतृत्व की भूमिका
खनिज विभाग के एमई (माइनिंग इंजीनियर) आहत शाम सिद्दीकी ने बताया कि विभाग की टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा— “सीमेंट उद्योग में आई गिरावट हमारे लिए चुनौती थी, लेकिन हमने नीलामी और सख्त कार्रवाई के जरिए राजस्व घाटे की भरपाई करने की कोशिश की गई। हमारी प्राथमिकता अवैध खनन पर अंकुश लगाकर खनिज संपदा का संरक्षण सुनिश्चित करना है।” उन्होंने यह भी बताया कि विभाग आने वाले समय में और ज्यादा पारदर्शी, तकनीकी आधारित प्रणाली अपनाकर न केवल अवैध खनन पर नियंत्रण करेगा, बल्कि खनिज नीलामी से अधिकतम आय अर्जित करने की दिशा में भी काम करेगा।


