शाजापुर की चीलर डैम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली दोनों मुख्य नहरें इस साल अनुपयोगी साबित हो रही हैं। कम वर्षा और डैम में पर्याप्त जल संग्रहण न होने के कारण किसानों को इस बार नहरों से एक बूंद पानी भी नहीं मिल पाएगा। शहर के बीच से गुजरने वाली ये नहरें अब सूखकर नाले में तब्दील हो गई हैं। 21.5 किलोमीटर लंबी ये नहरें अब गंदगी, बदबू और मच्छरों का बड़ा कारण बन चुकी हैं। वर्षों से सफाई न होने और पानी का प्रवाह बंद रहने के कारण कई स्थानों पर कचरा, सड़ा हुआ पानी और झाड़ियां जमा हो गई हैं। आदर्श कॉलोनी, ज्योति नगर और नवीन नगर सहित कई क्षेत्रों में नहरों के किनारे कचरे के ढेर लगे हैं। कई इलाकों में घरों की नालियों का गंदा पानी सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है। रहवासियों का कहना है कि उचित निकासी व्यवस्था न होने के कारण वे ऐसा करने को मजबूर हैं, जिससे आसपास रहना मुश्किल हो गया है। जेसीबी से सफाई बेअसर, स्थायी समाधान के कार्रवाई नहीं पूर्व में नगर पालिका की ओर से जेसीबी से सफाई कराई गई थी, लेकिन गंदगी के स्रोत बंद न होने के कारण स्थिति फिर वैसी ही हो गई। नगर पालिका अध्यक्ष ने स्थायी समाधान की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 23 फीट के चीलर डैम सिर्फ 13.5 फीट भरा उल्लेखनीय है कि 1971-72 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी इन नहरों का उद्देश्य लगभग 4500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और शहर को पेयजल आपूर्ति करना था। इस वर्ष 1 जून से 30 सितंबर तक केवल 650 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 987.7 मिमी है। इसके परिणामस्वरूप, चीलर डैम केवल 13.5 फीट ही भर पाया, जबकि इसकी आवश्यकता 23 फीट है। सिंचाई विभाग के एसडीओ अंकित पाटीदार ने बताया कि कम वर्षा के कारण चीलर डैम में पानी का स्तर 13.5 फीट ही है। जल उपयोगिता समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि किसानों को नहरों के माध्यम से इस बार पानी नहीं दिया जाएगा। इसी वजह से नहरों की सफाई भी नहीं की गई है, क्योंकि हर साल पानी छोड़ने से पहले नगर पालिका और सिंचाई विभाग मिलकर सफाई करते हैं।


