राजधानी में चुनाव ड्यूटी से नाम हटवाने के लिए अजब-गजब बहाने बनाए जा रहे हैं। एक कर्मचारी ने पेट दर्द, उल्टी और अपच की समस्या तो एक ने मतदाता पेटी ना उठा पाने और आंख से धुंधला दिखने तो वहीं, कुछ कर्मचारी कह रहे हैं, चुनाव में पति पत्नी की ड्यूटी लग गई है बच्चा कौन संभालेगा मेरे अलावा कोई देखरेख करने वाला नहीं है। जिला पंचायत कार्यालय में सुबह से शाम तक कर्मचारी नाम कटवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। दो हजार से अधिक कर्मचारी इलेक्शन ड्यूटी से नाम हटवाने के लिए आवेदन दे चुके हैं। एक कर्मचारी ने आवेदन दिया कि वह रायपुर नगर निगम क्षेत्र में रहता है। चुनाव ड्यूटी की वजह से मतदान नहीं कर पाऊंगा। इसलिए मतदान मेरा मौलिक अधिकार है। इसलिए चुनाव ड्यूटी से मेरा नाम काट दिजिए। गंभीर बीमारी वालों को ही राहत : जिला पंचायत के अफसर ने बताया कि गर्भवती महिलाएं या फिर बच्चे बहुत छोटे हैं तो उनका बर्थ सर्टिफिकेट देखकर और गंभीर बीमारी से ग्रसित कर्मचारी की ही ड्यूटी हटाई गई है। बगैर किसी मजबूत कारण के ड्यूटी नहीं हटाई जाएगी। इस तरह के आ रहे आवेदन पंचायत कार्यालय में मंगलवार को चुनाव ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए अपनी-अपनी अर्जी देकर मजबूूरी बताते कर्मचारी। 11 माह में तीसरी ड्यूटी से बिफरे शिक्षक, बोले- कोर्स अधूरा राजधानी में 11 फरवरी को निकाय चुनाव होने हैं। पिछले 11 माह में तीसरी बार चुनाव हो रहा है। जिले के 6 हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। बड़ी संख्या में अपना नाम ट्रेनिंग और ड्यूटी से कटाने के लिए जिला पंचायत कार्यालय में शिक्षक पहुंच रहे हैं। अगले माह 1 तारीख से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। कोर्स भी पूरा नहीं हुआ है। इसके बाद भी शासन ने इनकी ड्यूटी लगाई है। चुनाव संबंधी काम तो पूरा होता है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई पर इसका खासा असर पड़ता है। जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, इनमें साइंस, गणित और अंग्रेजी विषयों के टीचर्स भी हैं। तीनों ही विषय छात्रों के लिए कठिन माने जाते हैं। दसवीं, बारहवीं की परीक्षाएं मार्च के पहले हफ्ते से ही शुरु हो रही है। एक साल में तीन बार चुनाव होने से अब तक स्कूलों में 60-65 फीसदी कोर्स ही हो पाया है। जिले में साइंस के 300 से ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी लगी है। बोर्ड परीक्षा पास है ऐसे में बच्चों के रिविजन और बाकी कोर्स के लिए शिक्षकों पर भी काफी बोझ है। केस- 1 आवेदन देने आए एक शिक्षक ने बताया कि लोकसभा और विधानसभा के बाद फिर चुनाव ड्यूटी लगा दी है। स्कूल में 60% कोर्स ही पूरा हुआ है। यह बच्चों के साथ नाइंसाफी है। पढ़ाना मुश्किल हो चुका है। शिक्षकों से एक सत्र में तीन बार चुनाव ड्यूटी कराना गलत है। केस- 2 आवेदन लेकर जिला पंचायत कार्यालय घूम रहे एक शिक्षक ने बताया कि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है। वह चल फिर नहीं पा रहा है। इस बार उसकी चुनाव ड्यूटी लगी है। जिसे कैंसिल करवाकर वह उसकी जगह अपनी ड्यूटी लगवाने का आवेदन लेकर पहुंचा था। लेकिन जिला पंचायत कार्यालय में उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया।


