चुनाव प्रचार में भी ज्यादातर महिला उम्मीदवारों के पति, ससुर या पिता ही आगे रहे

शिवराज द्रुपद | अमृतसर महिलाएं किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं के जुमले आम हैं मगर हकीकत इसके विपरीत है, जिसे सब जानते हैं। महिलाओं के लिए हर फील्ड में रिजर्वेशन का प्रावधान है। वर्तमान नगर निगम चुनाव में भी नारी सशक्तिकरण रिजर्व कोटे पर ही टिका हुआ है। वैसे तो सभी 85 वार्डों में 477 उम्मीदवारों में 232 पुरुष और 245 महिलाएं है मगर रिजर्व वार्डों की 226 को छोड़ दें तो मिक्स 43 वार्डों में 213 पुरुषों के मुकाबले सिर्फ 19 महिला उम्मीदवार ही मैदान में हैं। इस बार 85 वार्डों में महिलाओं के लिए 42 रिजर्व हैं। बाकी 43 में जनरल, एससी, बीसी और शिड्यूल के लिए रिजर्व वार्ड हैं। महिलाओं के लिए रिजर्व सभी 42 वार्डों में इस बार 226 महिलाएं मैदान में हैं। वैसे तो यहां पर इनकी उपस्थिति इसलिए नहीं है कि पुरुष प्रधान समाज ने उनको मौका दिया है अपितु रिजर्वेशन की मजबूरी के चलते उनको मौका दिया गया है। क्योंकि इनमें से तमाम महिलाएं ऐसी हैं जिनके पति, पिता, भाई अथवा परिवार का पुरुष मेंबर पहले से सियासत में है। खुद का वर्चस्व बनाए रखने के लिए उनको आगे किया गया है। मिक्स 43 वार्डों में जनरल, ओबीसी और एसी रिजर्व वार्ड शामिल हैंं। इन वार्डों पर कुल 232 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें महिला-पुरुषों की तादाद को देखें तो इनमें 213 पुरुष हैं, जबकि 19 महिलाएं हैं। यहां पर महिलाओं की उपस्थिति बमुश्किल 9 फीसदी बनती है। यह वह महिलाएं हैं जो अपने बलबूते और पहचान के दम पर मैदान में उतरीं हैं। खैर, चुनाव में जीतने के बाद भी पुरुष प्रधान समाज हाउस में भी अपना दखल और दबदबा कायम रखेगा, क्योंकि विगत के चुनावों में भी चंद महिलाओं को छोड़ महिला पार्षदों के काम ज्यादातर उनसे संबंधित पुरुष मेंबर ही देखते रहे हैं।

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